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Sunday, November 2018
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VIDEO: युगांडा में गणेशोत्सव की धूम, ढोल नगाड़े के साथ होगा बाप्पा का आगमन
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VIDEO: युगांडा में गणेशोत्सव की धूम, ढोल नगाड़े के साथ होगा बाप्पा का आगमन

भारत में ही नहीं विदेशों में भी गणेश उत्सव विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। अब महाराष्ट्र और देश से निकलकर अब अफ्रीका तक जा पहुंचा है।
अफ्रीका के उगांडा में गणपत्ति के आगमन की तैयारी शुरू हो गयी है। जहाँ लोग अफ़्रीकी ढोल नगाड़ों के साथ बाप्पा को अपने अपने घरों में ला रहे है। अब इसका एक वीडियो भी सामने आया है जहाँ कई अफ़्रीकी लोग अपने मूल वेश भूषा में खड़े हो कर अफ़्रीकी परंपराओं में बजाये जाने वाले वाद्ययंत्र बजा रहे हैं और पीछे से गणपत्ति बाप्पा मौर्य का उद्घोष कर रहे हैं।

अफ्रीका में गणेश जी को दुष्टात्माओं के दुष्प्रभाव से रक्षा करने वाला देवता माना जाता है। उगांडा में गणेश जी को अफ़्रीकी मान्यतों में भी जगह मिली हुई है, कई शहरों में गणपति बौद्ध विहारों एवं मंदिरों के द्वार के ऊपर स्थापित हैं। अफ्रीका में भारतियों के साथ बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म को मानने वाले तिबत्ती रहते हैं। तिब्बत में कहा जाता है कि भगवान बुद्ध ने अपने शिष्यों से गणपति हृदय नामक मंत्र जपवाया था। यहां बुद्ध का एक चिन्ह हाथी है और गणपति का मस्तक भी हाथी है जो कुछ समानता बताता है।

ईसा से 236 वर्ष पूर्व मिस्र में श्री गणेश के कई मंदिर थे। उस समय इन्हें कृषि रक्षक के नाम से पूजा जाता था। किसान अपने खेत में ऊंचे स्थान पर गणेश प्रतिमा स्थापित करते थे जिससे फसलें रोगमुक्त रहें तथा पैदावार अच्छी हो। विद्वानों का मानना है कि भारत के बाहर गणेश पूजन का प्रसार बौद्ध धर्म के साथ ही हुआ है।

उगांडा के इलावा, नेपाल, सिंगापोर , थाईलैंड, जावा एवं बाली में गणेश जी की पूजा की जाती है। इसी प्रकार श्रीलंका, म्यांमार में भी विभिन्न रूपों में गणेश पूजा की जाती है। बोर्नियो में भी विभिन्न रूपों में गणेश और बुद्ध की जुड़वां प्रतिमाएं हैं।

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