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Wednesday, December 2018
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शर्मनाक लोकेशन 12 घण्टों तक भटकती रही गर्भवती, हारकर चलती लोकल में दिया बच्चे को जन्म
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शर्मनाक लोकेशन 12 घण्टों तक भटकती रही गर्भवती, हारकर चलती लोकल में दिया बच्चे को जन्म

इन दिनों देश में तरह तरह के कैम्पेन चलाये जा रहे हैं. विशेष तौर महिलाओं को लेकर तो खुद प्रधानमंत्री न जाने कितने वादे कर चुके हैं. लेकिन देशी की राजधानी मुंबईं में एक गर्भवती के साथ जो कुछ भी हुआ. वो बेहद शर्मनाक दिल दहलाने वाला है. एक गर्भवती 12 घंटे तक दर्द से तड़पती करहाती रही. लेकिन किसी भी अस्पताल ने उसे भर्ती नहीं लिया. हारकर उस जननी ने मुंबई के लोकल ट्रेन के डब्बे में अपने बच्चे को जन्म दिया.

पूरी खबर जानने से पहले इस सीसीटीवी फुटेज को देखिए, कैसे एक पाती अपनी नौ महीने की गर्भवती पत्नी को गोद मे उठाए सीढ़िया पर दौड़ रहा है. इस तरह वो एक से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगता रहा. मगर किसी भी अस्पताल ने उसकी नहीं सुनी. वो एक स्टेशन पर उतरता फिर वहां से इस तरह लेकर पत्नी को भागता. बदनसीब पति का नाम है सुशील तिवारी और इनकी गोद मे जो महिला है इनकी पत्नी सुलेखा तिवारी है. जिसने चलती ट्रेन में एक सुन्दर सी बेटी को जन्म दिया है. लेकिन इनकी मुसीबत यहीं ख़त्म नहीं हुई जब बच्ची पैदा हुई तो यह फौरन उसे लेकर अस्पताल भागे. नवजात शिशु माँ के सलवार में ही रह गयी,थी. खून लगातार बह रहा था फिर फौरन पति ने गोद मे उठा कर अस्पताल भागा.

सुशील भायंदर इलाके में ही रहते है और सिक्योरिटी गार्ड का काम करते है. इनकी पत्नी सुलेखा तिवारी प्रेग्नेंट थी और 25 तारीख की रात को उन्हें लेबर पेन होना शुरू हुआ. जिसके बाद सुशील अपनी पत्नी को लेकर पास के ही थेम्पा म्युनिसिपल सरकारी हॉस्पिटल में गए. ये बात रात के 2.30 बजे की है. क्योंकि इस हॉस्पिटल में किसी तरह का नवजात बच्चों का ICU नही था इसीलिए उन्हें कांदिवली के शताब्दी हॉस्पिटल में जाने के लिए कहा. जिसके बाद सुशील अपनी पत्नी के साथ रात के करीब 3.30 बजे शताब्दी हॉस्पिटल पहुँच जाते है.और फिर वहीँ से उनकी परेशानी शुरू होती है.

सुशील अपनी पत्नी को लेकर करीब 15 किलोमीटर दूर कांदिवली के शताब्दी हॉस्पिटल ले कर आया. बतौर सुशील, यहाँ पर करीब 4 घण्टे तक यानी सुबह के 7 बजे तक उनकी पत्नी का किसी ने कोई इलाज नही किया और वो कुर्सी पर ही दर्द से तड़पती रही. इसके बाद उन्हें शताब्दी होस्पिटल के डॉक्टर्स और वार्ड बॉयज ने दुबारा थेपला हॉस्पिटल जाकर पिंक स्लिप यानी रेफ़ेर्स पेपर्स लाने के लिए कहा गया. अब सुशील अपनी पत्नी के साथ 15 किलोमीटर वापस वो पेपर लेने आए और दुबारा 11 बजे शताब्दी हॉस्पिटल पहुंचे. जहाँ अब एक बार फिर डिपार्टमेंट से जुड़े लोग इलाज करने से मना कर देते है और अब उनकी पत्नी को कई किलोमीटर दूर मुम्बई सेंट्रल इलाके में मौजूद नायर हॉस्पिटल जाने के लिए कहते है.

लाख बार समझाने के बाद भी हॉस्पिटल स्टाफ का दिल नही पसीजा तो मजबूरन सुशील लोकल ट्रेन में ही सवार हो कर निकल पड़ते है. लेकिन दादर स्टेशन के आगे बढ़ते ही पत्नी की तबियत बिगड़ी प्रभादेवी स्टेशन पर इमरजेंसी में उनकी पत्नी की डिलीवरी करवानी पड़ी. इस पूरे कठिन दौर में कोई भी शख्स इनकी मदद के लिए आगे नही आया है. डिलीवरी के बाद माँ और बच्चे को उसकी हालत में अपनी गोद मे उठा कर सुशील टैक्सी में डालता है और फिर KEM पहुँचता है. सुशील अपनी प्रेग्नेंट पत्नी को लेकर नायर हॉस्पिटल जाने लगता है तो वो बाहर खड़ी एम्बुलेंस से मदद मांगता है तो एम्बुलेंस वाला उझसे इसकी एवज में 3000 रुपये की मांग करता है जो सुशील के पास नही थे.

अब जब ये पूरा मामला सामने आया है तो अस्पताल ने भी अपनी गलती मानी है. उनका कहना है कि, शताब्दी अस्पताल प्रशासन ने ना केवल इस मामले में अपनी गलती स्वीकारी बल्कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करके दोषियों के खिलाफ कड़ी करवाई का भरोसा भी दिलाया है.

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