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आजकल के इस रफ़्तार भरे वक़्त में, जहा मेयार से ज़्यादा मिक़्दार या तादात और वज़न पे भरोसा किया जाता है, वही एंकर संदीप पाल जैसे चंद पत्रकार है, जो अब भी खुसूसियत और मेयार को अहमियत देते हुए अपने काम को अंजाम देते है। आज के दौर में जहा एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म अमूमन एक्टर्स और एक्ट्रेसेस के पब्लिसिटी के लिए इस्तेमाल होता है, वही संदीप हमेशा यह तय करके रखता है की उसे इन सब वाहयात तरीको से दूर ही नहीं बल के उसे इनसे किसी भी तरह का नाता नहीं रखना है।
उसकी हमेशा कोशिश यह ही रही है की दुनिया के सामने सच्चाई लेके आया जा सके! संदीप के लफ्ज़ो में, “बिना ढके, बिना तोड़े मदोडे, जो कोरी असलियत है वह अपने लिबास में अवाम के सामने आये!”
इसी वजह से वह कई दफे परेशानियों और दिक्कतों का सामना कर चुके है! यह कहना कतई गलत नहीं होगा की जौर्नालिस्ट संदीप पाल का और विवादों का चोली दामन का साथ है!
एक ऐसी ही वाक़्या है जिसके बारे में हमारे सूत्रों ने कुछ यु कहा, “कुछ दिन पहले संदीप ने एक “ब्रेकिंग” आर्टिकल किया था जहा वह एक फिल्म की पूरी कहानी उस आर्टिकल में लिख दिया था। फिल्म थी डायरेक्टर अनुराग कश्यप की आनेवाली पेशकश “चोक्ड”। जब अनुराग कश्यप को इस बारे में भनक पड़ी तब वह सोच में पढ़ गए की फिल्म की कहानी अगर ऐसे बहार आ गयी, तो फिल्म में कुछ बाकी नहीं रहेगा! इसीलिए , बिना दोबारा सोचे उन्होंने सीधा संदीप को कॉल लगाया और स्टोरी को उतारने की हिदायत दी, लेकिन ढीट प्रकृति के संदीप ने स्टोरी अभी तक वेबसाइट से उतारा नहीं!”
जब हमने संदीप से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा, “जी हां यह सच है, अनुराग ने मुझे कॉल पे कहा था की यह स्टोरी उनके फिल्म की पूरी कहानी बयान करती है और मेरे उस स्टोरी में कुछ ऐसे पोशीदा तफ़्सीलातो का ज़िक्र है, जो अगर सबको पता लग गया फिर हर कोई फिल्म के बारे में पहले से ही घोर-o-फ़िक्र करने लग पड़ेंगे! और यह फिल्म के लिए अच्छी बात नहीं है!”
संदीप ने अनुराग से गुफ्तगू के बारे में और खुलासा करते हुए कहा की, “अनुराग ने यहाँ तक कहा की फिल्म में सब नए लोग है, यह वैसे भी एक रिस्क ले रहे है हम, और ऊपर से अगर फिल्म के बारे में लोगो को पहले से ही इल्म हुआ तो बोहोत बुरा होगा! इसीलिए उन्होंने मुझसे यह इल्तिजा की, के मई उस स्टोरी को हटा दू!”
लेकिन जैसे की हमने पहले कहा है , स्टोरी अभी तलक हटाया नहीं गया है। इस बारे में संदीप ने कहा की फिल्म बनाना उनका काम है, वैसे ही धुंध धुंध के स्टोरीज निकलना हमारा, वह उनका काम करे, हम हमारा। “मैंने उनसे कहा की जिस तरह से वह अपना काम कर रहे है, ठीक उसी तरह मैं भी अपना काम कर रहा था! हालांकि मै सौ-फ़ीसदी समझता हु के उनका मुत्तसिफ़ होना लाज़मी है, पर, मैंने स्टोरी हटाया तो नहीं, लेकिन जिस हिस्से से उन्हें खासी नाराज़ी थी, मैंने उस हिस्से को स्टोरी से हटा दिया! इससे, उनका भी काम बन गया और मैंने भी अपनी बात रख ली!”
इसे कहते है असली जर्नलिज्म, बिना किसी की परवाह किये हुए, इस तरह बेबाक होकर चीज़ों को सामने लाना बेशक संदीप का बुलंद हौसला और हिमायत ज़ाहिर करता है! और इसी तरह चीज़ें होनी चाहिए! तभी ‘फ्री प्रेस’ – इस जुमले की ताक़त से सब वाक़िफ़ होंगे!

abhi

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