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शर्मनाक लोकेशन 12 घण्टों तक भटकती रही गर्भवती, हारकर चलती लोकल में दिया बच्चे को जन्म

अब जब ये पूरा मामला सामने आया है तो अस्पताल ने भी अपनी गलती मानी है. उनका कहना है कि, शताब्दी अस्पताल प्रशासन ने ना केवल इस मामले में अपनी गलती स्वीकारी बल्कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करके दोषियों के खिलाफ कड़ी करवाई का भरोसा भी दिलाया है.

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इन दिनों देश में तरह तरह के कैम्पेन चलाये जा रहे हैं. विशेष तौर महिलाओं को लेकर तो खुद प्रधानमंत्री न जाने कितने वादे कर चुके हैं. लेकिन देशी की राजधानी मुंबईं में एक गर्भवती के साथ जो कुछ भी हुआ. वो बेहद शर्मनाक दिल दहलाने वाला है. एक गर्भवती 12 घंटे तक दर्द से तड़पती करहाती रही. लेकिन किसी भी अस्पताल ने उसे भर्ती नहीं लिया. हारकर उस जननी ने मुंबई के लोकल ट्रेन के डब्बे में अपने बच्चे को जन्म दिया.

पूरी खबर जानने से पहले इस सीसीटीवी फुटेज को देखिए, कैसे एक पाती अपनी नौ महीने की गर्भवती पत्नी को गोद मे उठाए सीढ़िया पर दौड़ रहा है. इस तरह वो एक से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगता रहा. मगर किसी भी अस्पताल ने उसकी नहीं सुनी. वो एक स्टेशन पर उतरता फिर वहां से इस तरह लेकर पत्नी को भागता. बदनसीब पति का नाम है सुशील तिवारी और इनकी गोद मे जो महिला है इनकी पत्नी सुलेखा तिवारी है. जिसने चलती ट्रेन में एक सुन्दर सी बेटी को जन्म दिया है. लेकिन इनकी मुसीबत यहीं ख़त्म नहीं हुई जब बच्ची पैदा हुई तो यह फौरन उसे लेकर अस्पताल भागे. नवजात शिशु माँ के सलवार में ही रह गयी,थी. खून लगातार बह रहा था फिर फौरन पति ने गोद मे उठा कर अस्पताल भागा.

सुशील भायंदर इलाके में ही रहते है और सिक्योरिटी गार्ड का काम करते है. इनकी पत्नी सुलेखा तिवारी प्रेग्नेंट थी और 25 तारीख की रात को उन्हें लेबर पेन होना शुरू हुआ. जिसके बाद सुशील अपनी पत्नी को लेकर पास के ही थेम्पा म्युनिसिपल सरकारी हॉस्पिटल में गए. ये बात रात के 2.30 बजे की है. क्योंकि इस हॉस्पिटल में किसी तरह का नवजात बच्चों का ICU नही था इसीलिए उन्हें कांदिवली के शताब्दी हॉस्पिटल में जाने के लिए कहा. जिसके बाद सुशील अपनी पत्नी के साथ रात के करीब 3.30 बजे शताब्दी हॉस्पिटल पहुँच जाते है.और फिर वहीँ से उनकी परेशानी शुरू होती है.

सुशील अपनी पत्नी को लेकर करीब 15 किलोमीटर दूर कांदिवली के शताब्दी हॉस्पिटल ले कर आया. बतौर सुशील, यहाँ पर करीब 4 घण्टे तक यानी सुबह के 7 बजे तक उनकी पत्नी का किसी ने कोई इलाज नही किया और वो कुर्सी पर ही दर्द से तड़पती रही. इसके बाद उन्हें शताब्दी होस्पिटल के डॉक्टर्स और वार्ड बॉयज ने दुबारा थेपला हॉस्पिटल जाकर पिंक स्लिप यानी रेफ़ेर्स पेपर्स लाने के लिए कहा गया. अब सुशील अपनी पत्नी के साथ 15 किलोमीटर वापस वो पेपर लेने आए और दुबारा 11 बजे शताब्दी हॉस्पिटल पहुंचे. जहाँ अब एक बार फिर डिपार्टमेंट से जुड़े लोग इलाज करने से मना कर देते है और अब उनकी पत्नी को कई किलोमीटर दूर मुम्बई सेंट्रल इलाके में मौजूद नायर हॉस्पिटल जाने के लिए कहते है.

लाख बार समझाने के बाद भी हॉस्पिटल स्टाफ का दिल नही पसीजा तो मजबूरन सुशील लोकल ट्रेन में ही सवार हो कर निकल पड़ते है. लेकिन दादर स्टेशन के आगे बढ़ते ही पत्नी की तबियत बिगड़ी प्रभादेवी स्टेशन पर इमरजेंसी में उनकी पत्नी की डिलीवरी करवानी पड़ी. इस पूरे कठिन दौर में कोई भी शख्स इनकी मदद के लिए आगे नही आया है. डिलीवरी के बाद माँ और बच्चे को उसकी हालत में अपनी गोद मे उठा कर सुशील टैक्सी में डालता है और फिर KEM पहुँचता है. सुशील अपनी प्रेग्नेंट पत्नी को लेकर नायर हॉस्पिटल जाने लगता है तो वो बाहर खड़ी एम्बुलेंस से मदद मांगता है तो एम्बुलेंस वाला उझसे इसकी एवज में 3000 रुपये की मांग करता है जो सुशील के पास नही थे.

अब जब ये पूरा मामला सामने आया है तो अस्पताल ने भी अपनी गलती मानी है. उनका कहना है कि, शताब्दी अस्पताल प्रशासन ने ना केवल इस मामले में अपनी गलती स्वीकारी बल्कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करके दोषियों के खिलाफ कड़ी करवाई का भरोसा भी दिलाया है.

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आलोक वर्मा के बाद राकेश अस्थाना की भी CBI से छुट्टी, 3 और अफसर हटाए गए

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rakesh asthana

सरकार ने सीबीआई में सफाई अभियान जारी रखते हुए गुरुवार को सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को उनके पद से हटाकर सिविल एविएशन सिक्योरिटी ब्यूरो भेज दिया. उनके साथ ही ज्वॉइंट डायरेक्टर ए. के. शर्मा, डीआईजी एम. के. सिन्हा और जयंत नायकनवारे का कार्यकाल भी घटा दिया गया. इससे पहले सरकार ने आलोक वर्मा को सीबीआई के डायरेक्टर पद से हटा दिया था और फायर सेफ्टी विभाग में भेज दिया था. वर्मा ने बाद में अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया.

सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई डायरेक्टर के रूप में बहाल आलोक वर्मा को चयन समिति की बैठक के बाद निदेशक पद से हटाया गया था. उनको हटाने का फैसला तीन सदस्यों वाली उच्चस्तरीय चयन समिति ने 2-1 के बहुमत से लिया. सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली कि सेलेक्ट कमेटी के फैसले से पहले चीफ जस्टिस की ओर से मनोनीत किए गए सदस्य जस्टिस ए.के. सीकरी ने सरकार का पक्ष लेते हुए कहा कि वर्मा को केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच के नतीजों के आधार पर पद से हटा दिया जाना चाहिए.

माना जा रहा है कि अस्थाना के खिलाफ कार्रवाई उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर की गई है. सीबीआई ने अस्थाना, निलंबित पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) देवेंद्र कुमार और 2 अन्य के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगा गया है कि उन्होंने दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच पांच बार रिश्वत ली थी.

अस्थाना 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने एक कारोबारी से 2 करोड़ रुपए रिश्वत ली. इस मामले की जांच एक विशेष जांच दल कर रहा था. 

अस्थाना से पहले आलोक वर्मा के खिलाफ कार्रवाई हुई. सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर रहे राकेश अस्थाना के साथ वर्मा का विवाद जगजाहिर होने के बाद उनको 23 अक्टूबर की बीच रात एजेंसी के प्रमुख पद से हटा दिया गया लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनको फिर से बहाल कर दिया. कोर्ट ने यह दलील दी कि सरकार सेलेक्ट कमेटी से राय किए बगैर सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति में बदलाव नहीं कर सकती है.

क्या है पूरा मामला

सीबीआई ने मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ एक मामले को रफा-दफा करने के लिए 2 करोड़ रुपए रिश्वत लेने के आरोप में अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया. इसके बाद अस्थाना ने कई मामलों में अपने अधिकारी आलोक वर्मा के खिलाफ रिश्वत के आरोप लगाए. मामला धीरे-धीरे सियासी बनता चला गया और विपक्षी दलों ने इसका ठीकरा सीधा प्रधानमंत्री मोदी पर फोड़ा. मामला कोर्ट तक पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने काफी अहम फैसला सुनाया जिसमें आलोक वर्मा अपने पद पर पुनः बहाल हुए लेकिन सेलेक्ट कमेटी ने उन्हें हटा दिया.

वर्मा के हटते ही सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को फिर से डायरेक्टर का कार्यभार मिल गया. राव 1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. अस्थाना और वर्मा ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, जिससे सीबीआई की साख पर सवाल उठे हैं. विवादों के बाद केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था. इसके साथ ही राव को अंतरिम निदेशक बनाया गया था. अभी हाल में आलोक वर्मा को डायरेक्टर पद पर बहाल करने के 48 घंटे के भीतर ही उन्हें पद से हटाकर राव को पदभार दिया गया.

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कंगना की ‘ठाकरे’ को ‘ना’ Date पर रिलीज़ होगी ‘मणिकर्णिका’, एक्ट्रेस ने शिवसेना की अपील काे ठुकरा दिया है

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित ज़ी स्टूडियो एवं कृश द्वारा फिल्म मणिकर्णिका का निर्माण किया जा रहा है. इस फिल्म में अभिनेत्री कंगना राणावत ने रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका अदा की है.

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#EmraanHashmi Preponed the release of #CheatIndia has been preponed to avoid a clash with Thackeray, but #Manikarnika is said no

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने शिवसेना की अपील को सिरे से खारिज कर दिया है. कह दिया है कि, 25 जनवरी को रिलीज हो रही बाला साहब ठाकरे पर बनाई गई फिल्‍म ‘ठाकरे’ के कारण वो अपनी फिल्म नहीं टाल सकतीं. उसी तारीख पर एक्टर इमरान हाशमी भी रिलीज़ हो रही है. इमरान ने शिवसेना की बात मानते हुए अपनी फिल्‍म ‘चीट इंडिया’ की रिलीज तारीख आगे बढ़ा दी है. कंगना 25 जनवरी को ही अपनी फिल्‍म ‘मणिकर्णिका’ को रिलीज करेंगी.

शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे की ज़िन्दगी पर बनने वाली फिल्‍म ‘ठाकरे’ को 25 जनवरी को रिलीज कर रही है. इस फिल्म को ज़्यादा से ज़्यादा समर्थन मिले इसके लिए शिवसेना ने उन सभी प्रोड्यूसरों से अपील की थी की जिनकी भी फिल्म उसी दिन रिलीज़ हो रही है, वो उसकी तारीख थोड़ी आगे बढ़ा लें. इमरान ने शिवसेना का साथ दिया और हाँ कहा. लेकिन कंगना फिलहाल मानने को तैयार नहीं हैं. कंगना ने झांसी की रानी पर बनी फिल्‍म ‘मणिकर्णिका’ की रिलीज डेट 25 जनवरी से आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है.

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित ज़ी स्टूडियो एवं कृश द्वारा फिल्म मणिकर्णिका का निर्माण किया जा रहा है. इस फिल्म में अभिनेत्री कंगना राणावत ने रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका अदा की है.

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मुंबई एयरपोर्ट पर सीआईएसफ की हेकड़ी- व्हीलचेयर पर बैठी लड़की के साथ बदसलूखी और जबरन चेकिंग

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काश देश में आम लोगों की सुरक्षा करने वाले कुछ वर्दी वालों को थोड़ी अक्ल भी हो जाती ! अगर ऐसा होता तो शायद एक व्हीलचेयर पर बैठी लड़की के साथ बदसलूखी नहीं करते , उसे व्हील चेयर से उठकर तलाशी देने को नहीं कहते. ये सब हुआ 27 साल की मोटिवेटर विराली मोदी के साथ. मुंबई एयरपोर्ट पर न सिर्फ उनके साथ बदसलूखी की गई बल्कि उन्हें जबरन अपने व्हील चेयर से खड़े होने पर मजबूर किया गया. वो भी तब जब वहां मौजूद कई लोगों ने सुरक्षाकर्मियों को टोका की एक दिव्यांग को बेवजह परेशान किया जा रहा है. लेकिन उन्होंने किसी की एक नहीं सुनी.

विराली मोदी के साथ तब हुआ जब वो मुंबई से लंदन जा रहीं थी. इसका खुलासा उन्होंने खुद अपने सोशल मीडिया पेज पर किया है. विराली ने इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से जानकरी दी है. बताया कि, कैसे मुंबई एयरपोर्ट पर जबरन उन्हें व्हील चेयर से उतारा गया और चेकिंग की गई. विराली मोदी जो कि चल नहीं सकती, उनके बार-बार मना करने के बावजूद उनके पैरों को व्हील चेयर से उठाया गया, जिसकी वजह से उन्हें पैरों में दर्दनीय ऐठन हुई.

विराली मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि

“मैं जेट एयर वेज़ के जरिए मुम्बई से लंदन जा रही थी. चेकिंग के दौरान CISF की एक महिला मेरी व्हील चेयर स्कैन करने के बाद मुझे जबरन खड़े होने को बोलने लगीं. मैंने उनसे बार-बार कहा कि मैं उठ नहीं सकती. लेकिन वो महिला मुझे खड़े होने के लिए फोर्स करती रही. जब मैं नहीं मानी तो उसने मुझे मेरे पैरों से उठाया और एक और सुरक्षाकर्मी से मुझे पीठ की तरफ से उठाने के लिए कहा. इस पूरी घटना में मेरे पैरों में बहुत बुरा दर्द हुआ. ये दर्द इतना ज्यादा था कि मैं उस महिला के इस रवैये पर शिकायत दर्ज करना चाहती थी, लेकिन कोई भी सीआईएसएफ सीनियर वहां मौजूद नहीं था. क्या CISF को इसी तरह की ट्रेनिंग दी जाती है?

 

किसी भी डिसेअबल इंसान के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता. सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर केमिकल स्ट्राइप्स से व्हील चेयर और जूतों की चेकिंग की जाती है. इससे डिसेअबल पैसेंजर को ऐसे जबरन उठाने की जरुरत नहीं होती. लेकिन मुम्बई एयरपोर्ट पर ऐसा व्यवहार क्यों?

विराली कि इस शिकायत पर सीआईएसएफ की तरफ से बिना जांच के सिर्फ खाना पूर्ति ही की गई. और जवाब दिया गया कीCISF का इस पूरे घटनाक्रम पर कहना है कि हमारे लिए सिक्योरिटी महत्वपूर्ण है. हम स्पेशली एबल/जरुरतमंद पैसेंजर के साथ सम्मानित तरीके से ही व्यवहार करते हैं.

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