नोटबंदी का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के समय ये एलान का एलान किया था की 500 और 1000 रुपए को बंद करने के मकसद है काले धन पर रोक लगाना बल्कि ब्लैकमनी को पकड़ना था। लेकिन प्रधानमंत्री के इस नेक मक़सद की आड़ में पुणे पुलिस के कुछ अधिकारियों करोड़ों का खेल कर दिया।

पांच पुलिस अधिकारियों ने एक व्यापारी की गाड़ी से 3 करोड़ 20 लाख रुपए के पुराने नोट जब्त किए थे। मगर थाने के खाते में सिर्फ २० लाख दिखाया गया। अब जब इस पूरे मामले की जांच की तो सामने आया की बचे हुए पैसों को इन पुलिसवालों ने आपस में बाँट लिया। पैसों के इस खेल में कई अधिकारी भी शामिल है।

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ये पूरा मामला दो फरवरी का है जब कुछ व्यापारी एक एजेंट के साथ 500 और 1000 के पुराने के नोट बदलने चले थे। इसी बीच इसकी खबर कोथरुड़ पुलिस थाने के एसआई विक्रम राजपुत, कांस्टेबल अजिनाथ शिरसाट, अश्वजित सोनावणे, संदीप रिठे और हेमंत हेंद्रे को मिली थी। जिसके बाद पुलिस ने गाडी की जांच की तो एजेंट सुरेश अग्रवाल की गाड़ी से यह 3 करोड़ 20 लाख की रकम बरामद हुई, जिसके बाद पुलिस वालों ने पैसे जब्त कर लिए।

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खुलासा तब हुआ जब पुलिस वालों ने मीडिया को ये जानकारी दी की उन्होंने एक कर से बीस लाख रूपये बरामद किये हैं। जिसके बाद एजेंट सुरेश अग्रवाल सामने आया और इसने वरीय अधिकारियों को ये जानकारी दी की उसकी कर से २० लाख नहीं बल्कि  3 करोड़ 20 लाख की रकम बरामद हुई थी। मगर अधिकारियों ने सिर्फ बीस लाख की ही राशि ​दिखाई है। फिर जाकर इस मामले की जांच शुरू हुई। इस पूरी जांच की ज़िम्मेदारी सहायक पुलिस आयुक्त शरद उगले को सौंपी गयी थी। उनकी जांच में ये सामने आया की पुलिस द्वारा जब्त की गई रकम 3 करोड़ से अधिक थी वह उन्होंने आपस में बांट ली थी।

अब इस खुलासे के बाद सभी दोषी पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. दूसरी तरफ अब तक ये साफ़ नहीं है की तनी बड़ रकम किसकी थी और यह पैसे किससे बदलवाने थे।


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