ना सुराग़ था ना कोई गवाह फिर भी दो साल बाद पकड़ा गया क़त्ल का आरोपी

साल 2015 में बलिराम रखते नामक एक आदमी की लाश मुंबई के दादर में प्लाजा सिनेमा और दादर टर्मिनस को जाने वाली ब्रिज के निचे पड़ी मिली थी।  तभी वहां से गुजरने वाले लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी।  पुलिस युवक के शरीर में चोट के निशान​ मिलने की वजह से पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया था. हत्या का मामला तो पुलिस ने दर्ज कर लिया था। लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। इस केस को ट्रैक कैसे किया जाए, कैसे कातिल तक पंहुचा जाए।

पुलिस हत्यारे के तलाश में जुटती है। उसने जहाँ लाश मिली थी उसके आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया। इसी बीच पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज मिलता है, उसमे एक व्यक्ति लाश को फेककर भागते हुए दिखाई पड़ता है। लेकिन इस फुटेज में सबसे बड़ी समस्या ये थी की वीडियो में उस शख्स का चेहरा नहीं दिख रहा था।  उसमे सिर्फ उसे शख्स का पीठ ही दिख रहा है। पुलिस दादर के कई कुलियों को बुलाकर शख्स को पहचानने के लिए कहा। किसी कुली ने उसकी नील, तो किसी ने नीलेश तो किसी ने लंबू के रूप में शिनाख्त की। इसी बीच पुलिस को पता चला कि वह मेल गाड़ियों में जाकर बूट पॉलिश का काम करता है। इन कुलियों से पुलिस को जब आरोपी की पूरी पृष्ठभूमि पता चली, तो यह जानकारी भी मिली कि उसके खिलाफ मनमाड व दौंड में भी पहले केस दर्ज हो चुके हैं। कुर्ला क्राइम ब्रांच के सीनियर इंस्पेक्टर अजय सावंत, संपत राउत की टीम इसके बाद इन दोनों जगहों पर गई। पुलिस रिकॉर्ड चेक किया गया तो वारदात तो सही पाई गई, पर आरोपी के नाम अलग-अलग मिले। वहां घर के अड्रेस भी गलत लिखे हुए थे। इसलिए उन पतों पर पहुंचकर वहां वह नहीं, कोई और रहता हुआ पाया गया। क्राइम ब्रांच ने इन दोनों जगहों से उसके पुराने फोटो निकाल लिए और दादर में कुलियों को दिखा दिए। कुलियों ने फोटो की शिनाख्त कर ली।

पुलिस को पता चला की आरोपी का नाम शिवाजी घोडके है, इसने अपने ही दोस्त की हत्या कर ब्रिज के निचे फेक दिया था। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस की अलग- अलग टीमों ने देश के करीब एक दर्जन रेलवे स्टेशनों पर कई बार ट्रैप लगाया था, पर शिवाजी जांच अधिकारियों को हर बार चकमा देकर फरार हो जाता था।

इसी बीच पुलिस को पिछले साल शिवाजी घोड़के के चेहरे और हुलिया जैसी लाश मिलती है।  आरोपी शिवाजी घोड़के माता पिता ने उस लाश को अपने बेटे के रूप शिनाख्त की। लेकिन इसपर पुलिस को शक हुआ उसने उस लाश और माँ बाप का डीएनए टेस्ट किया तो इनका डीएनए नहीं मिला।

पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए ऐसा जाल बिछाया की आरोपी को उनपर शक ना हो। मंबई पुलिस की टीम क्राइम ब्रांच और रेलवे पुलिस ने शहर के भिखारियों को अपना खबरी बनाया। उन भिखारियों को कल्याण से मनमाड और अहमदनगर से श्रीरामपुर रेलवे स्टेशन तक करीब एक दर्जन शहरों में भेज दिया। उसी में एक भिखारी को आरोपी शिवाजी श्रीरामपुर रेलवे स्टेशन पर बूट पॉलिश करते हुए दिखा। उसने क्राइम ब्रांच अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इस तरह से पुलिस ने काफी मसक्कत के बाद इस केस को क्रैक किया,और आरोपी शिवाजी घोड़के क़ानून की गिरफ्त में आ गया।


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