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Exclusive: टूरिस्ट की शक्ल में आज भी हैं देश में पाकिस्तानी जासूस

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शायद आप सोंच भी न पाएं लेकिन आपके पड़ोस में रहने वाला आदमी या औरत पाकिस्तानी जासूस हो सकता है। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ये सरकारी आंकड़ा है। ये कौन हैं और किस मक़सद से देश में दाखिल हुए हैं इसकी कोई पुख्ता जानकारी न तो सरकार के पास है और न ही सुरक्षा एजेंसियों के पास है। इनमे से ज़्यादा लोग कहाँ और क्या कर रहे है इस बाबत भी सरकार के पास पूरी जानकारी नहीं। ये सवाल तब उठा है जब पाकिस्तानी आर्मी ने पूर्व नौसैनिक कुलभूषण जाधव को जासूसी के आरोप में सजा सुनाई है। लेकिन सूत्र बताते हैं की, ये आरोप लगाने वाला पाकिस्तान ने खुद भारत में अपने जासूसों की एक बड़ी फ़ौज तैयार कर रखी है। जो दुबई,नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते भारत आते हैं और पूरा नेटवर्क खड़ा करते हैं। कई तो ऐसे भी जो लीगल तरीके भारत में दाखिल तो होते हैं,लेकिन यहाँ घुसने के बाद लापता हो जाते हैं. आज भी पाकिस्तानी जासूस अपने नेटवर्क के ज़रिये भारत के खिलाफ साज़िश करता रहता है।

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ख़ुफ़िया एजेंसियों की मानें तो भारत में पाकिस्तान से आने वाले लोगों में से कई लोग ऐसे होते हैं जो पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आई इस आई के लिए काम करते हैं।  उनका भारत में दाखिल होना किसी मकसद से ही होता है।  पाकिस्तानी नागरिक और लश्कर का आतंकी डेविड हेडली का मामले में भी ऐसा ही खुलासा हुआ था। सूत्र बताते हैं की आज भी पाकिस्तानी एजेंसी में काम करने वाले एजेंट्स भारत में अपने रिश्तेदारों से मिलने के बहाने अपने स्लीपर सेल को एक्टिवेट करने के लिए आते हैं। जिनके ज़रिये उन्हें वक़्त वक़्त पर भारतीय सुरक्षा से जुडी जानकारियां मिलती रहती हैं। पूर्व में ऐसे कई एजेंट्स को गिरफ्तार भी किया जा चूका है। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में इस तरह से पाकिस्तानियों का होना देश के लीयते बड़ा खतरा भी है। कहीं न कहीं ये सुरक्षा एजेंसियों की चूक भी है।

गृह मंत्रालय ने राजयसभा में एक आंकड़ा रखते हुए ये जानकारी दी है की, पिछले दो साल यानी 1 जनवरी 2014 से 31 दिसंबर 2015 के बीच जितने भी पाकिस्तानी नागरिकों को विभिन्न श्रेणियों में भारत का वीजा दिया गया था, उनमें के 28 फीसद इसके खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से भारत में रुके रहे।

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अगर कुल संख्या की बात करें तो 48,510 पाकिस्तानी नागरिक जो पिछले दो साल में वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रुके रहे, उनमें से 25 फीसद यानी 2,200 को साल 2015 के अंत में जबरन स्वदेश भेजा गया। राज्यसभा में खुद केंद्रीय गृहराज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि 36,310 पाकिस्तानी नागरिक अब भी ऐसे हैं, जिनका वीजा खत्म हो गया है और वे अब भी भारत में रह रहे हैं।

जो संख्या बतायी गई है वो बेहद हैरान करने वाला भी है, साल 2014 में भारत ने 94,993 पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा जारी किया, जबकि 2015 में यह संख्या घटकर 77,543 रह गई। ऐसा नहीं है की भारत में अवैध तरीके से रहने वाले सिर्फ पाकिस्तानी ही हैं। साल 2014 में 6,52,919 बांग्लादेशी नागरिकों को वीजा जारी किया गया था, जबकि साल 2015 में 7,51,044 बांग्लादेशियों को वीजा जारी किए गए। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2014 से 31 दिसंबर 2014 के बीच 20,870 बांग्लादेशी नागरिक वीजा खत्म होने के बाद भी गैरकानूनी तरीके से भारत में रुके। इस दौरान 8387 बांग्लादेशियों को वापस उनके देश भेजा गया।

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हालांकि गृहमंत्रालय की तरफ से , केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने सफाई देते हुए कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां वीजा खत्म होने के बाद भी गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों पर नजर बनाए रखती हैं। ऐसे मामले जहां वीजा खत्म होने के बाद भी रुकना बिना किसी पूर्व योजना के हो या गलती से ऐसा हुआ हो, उन स्थितियों में फीस वसूलकर वीजा अवधि बढ़ा दी जाती है।

हालांकि जब कोई सोच-समझकर ऐसा करता है तो उन्हें देश छोड़ने का नोटिस देने के साथ ही उनसे वीजा फीस और पैनल्टी भी उगाही जाती है। इसके अलावा मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉर्नर्स एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जाती है।

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