खुद को गोली मारी और लिखा की मै बेटी हूँ इसमें मेरी क्या गलती

पुणे से सटे बारामती में एक 17 साल की छात्रा ने सिर्फ इसलिए खुद को गोली मारकर ख़त्म कर लिया क्यूंकि उसे लगने लगा था की परिवार को उसकी ज़रुरत नहीं है। वो बेटी है आर्मी परिवार में उसकी कोई ज़रुरत नहीं है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जूट गयी है। छात्रा बारामती में अपने परिवार के साथ रहती थी। घटना के वक़्त उसका भाई और माँ घर पर ही मौजूद थे। पिता आर्मी मैन है और वो सिक्किम में ड्यूटी पर तैनात हैं।
अब तक पुलिस जांच में जो बातें सामने आयी हैं उसके मुताबिक सायली उर्फ संध्या मानसिंह बलिल बारामती के विद्या प्रतिष्ठान काॅलेज में 11 वीं की स्टूडेंट थी। सायली अपने कमरे में थी तभी अचानक कमरे से गोली चलने की आवाज़ आयी, मां और भाई ने किसी तरह दरवाजा खोलकर देखा तो संध्या खून से लथपथ पड़ी थी, मौके पर ही उसकी मौत हो चुकी थी।
पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमे सायली ने लिखा है की …
उसका बेटी होना सबसे बड़ा जुर्म है , घर के लोग प्यार नहीं करते पसंद नहीं करते हैं। हर कोई उसे नफरत की नज़र से देखता है, मगर पता नहीं क्यों ? मेरे पास कोई विकल्प नहीं है… ऐसी ज़िन्दगी से बेहतर है की मैन खुद को ही ख़त्म कर लूँ ।
लेकिन इस पूरे ख़ुदकुशी ने पुलिस के सामने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसी क्या बात थी की सत्रह साल की लड़की को अपनी ज़िन्दगी ख़त्म करनी पड़ी, क्यों उसने परिवार इतने गंभीर आरोप लगाए हैं ? अगर वाक़िये में परिवार उसे पसंद नहीं करता था तो उसकी वजह क्या है ?
सबसे बड़ा सवाल ये की जिस पिस्तौल से सायली ने ख़ुदकुशी की है वह अवैध है। तो उसके पास यह पिस्तौल कैसे आया और किसने दिया।

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