दुबई में बैठकर ISI के ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचा रहा था फ़ारूक़ टकला

मोस्ट वांटेड आरोपी और डी का क़रीबी फ़ारूक़ टकला से भारतीय खुफिया एजेंसियां लगातार पूछताछ कर रही है। अब तक तफ्तीश में सामने आया है कि फारूक टकला धमाके के बाद सीधे पाकिस्तान गया था और वहां आईएसआई के संपर्क में आया। आईएसआई कि देखरेख में वो कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा था और अक्सर दुबई और कराची आना जाना करता था। उसकी ज़िम्मेदारी थी वो पाकिस्तान में डी गैंग के लोगों कि देखरेख करना। इसके इलावा इण्डिया से भाग कर पाकिस्तान आने वाले डी कंपनी के लोगों की मदद करना।

ख़ुफ़िया सूत्रों कि मानें, फ़ारूक़ ने दुबई में अपना पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था। वो डी गैंग की सारी ज़रूरतें वहीँ से पूरा करता था। वीसा और पासपोर्ट का काम भी टकला के हाँथ में था। इतना ही नहीं वो दाऊद के कहने पर टकला दुबई में उसके अवैध कारोबार की देखरेख भी करता था। डी कंपनी में लोग फ़ारूक़ को मैनेजर साहब कहकर बुलाते हैं। फ़ारूक़ टकला दाऊद की पत्नी महजबीन की ज़रुरत के सामन भी दुबई से पाकिस्तान भेजता था।

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कौन है टकला ?

डी कंपनी का मैनेजर फ़ारूक़ टकला कि तलाश भारतीय एजेंसियों को धमाके के बाद से ही थी। उसे पकड़ने के लिए सीबीआई ने साल 1995 में उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस भी जारी कराया था। 93 धमाके के चार्जशीट के मुताबिक फारूक मोहम्मद अहमद मोहम्मद यासीन मंसूरी उर्फ लांगड़ा का भाई है। भाई के कहने पर ही वो डी कंपनी में शामिल हुआ था। जिसके बाद वो गैंग में मैनेजर के तौर पर काम करने लगा था। गैंग के किसी शख्स को दावूद से मिलना भी होता था तो वो फ़ारूक़ के ज़रिये ही मुमकिन था। उसका नाम सबसे पहले जेजे शूटआउट में आया था।

मुंबई क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया कि जे जे में उस शूटआउट को कैसे अंजाम देना था उसका पूरा खाका टकला ने ही बनाया था। इसके इलावा रेकी भी कि थी।


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