पहली बार कैमरे पर क़ैद हुआ मुंबई का झपटमार गैंग

सीसीटीवी कैमरे पर पहली बार वो लोग क़ैद हुए हैं जो चलती ट्रैन में अचानक झपट्टा मारकर आपका कीमती मोबाइल और पर्स छीन ​लेते हैं। इनके चेहरे हम दिखाएं उससे पहले आप सीसीटीवी का ये फुटेज देखिये कैसे इस गिरोह के लोग चलती ट्रेन के बीच में एक शख्स का झपट मार कर फोन छीन लेता है।  मुंबई में इस गिरोह को लोग ‘फटका गैंग’ के नाम से जानते हैं। पकडे गए आरोपियों की पहचान नवीन प्रवीण दावने और अजीज उर रहमान खान के तौर पर हुई है।

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ये पूरी वारदात  2 मई को शाम 6 बजकर 30 मिनट के करीब प्लेट फॉर्म नंबर 5 की। प्लैटफॉर्म पर आयी लोकल जैसे ही टिटवाला के लिए रवाना हुई, सफ़ेद टी शर्ट में प्लेटफॉर्म पर खड़ा शख्स चलने लगता है।और सीधे उस आदमी के पास पहुंचता है जो लोकल के दरवाज़े पर खड़ा होकर मोबाईल पर बात कर रहा था। जैसे ही ट्रेन बढ़ी वो फुरि से आगे बढ़ता है और दरवाज़े पर फोन पर बात कर रहे यात्री को हाथ से मारकर उसका फोन गिरा देता है । मगर वो ये दिखने की कोशिश करता है ऐसा दरवाज़े पर खड़े शख्स की गलती से हुआ है। तब तक उसके गिरोह का दूसरा साथी आगे बढ़कर ये जताने की कोशिश करता है की उसे मोबाइल जमा करा देना चाहिए, फिर दोनों प्लैटफॉर्म पर कड़ी भीड़ को भी यही समझाने की कोशिश करता है। लेकिन उनकी ये पूरी हरकत प्लेटफार्म पर खड़े आरपीएफ के दो जवान देख ली थी। उन्हें जैसे ही जवानो ने पकड़ने की कोशिश करते हैं वह भागने लगता है। मगर यात्रियों की मदद से दोनों को पकड़ लिया गया।

आखिर क्या है फटका गैंग ?

आम लोगोनों को इस गैंग के काम करने का तरीका शायद समझ न आये। इस गिरोह के लोग किसी भी वारदात को बड़ी बारीकी से अंजाम देते हैं। इस गैंग के सदस्य अमूमन तब वारदातों को अंजाम देते हैं जब ट्रेन धीमी रफ्तार पर होती है। या फिर ट्रेन किसी मोड़ पर ट्रैक की अदला-बदली कर रही होती है या स्टेशन के पहुंचने के करीब होती है। ट्रेन जैसे ही धीमी गति पकड़ती है, इस गैंग के सदस्यों की गिद्ध निगाहें डिब्बे में दरवाजे के पास खड़े होकर सफर कर रगे लोगों के कीमती मोबाइलों को स्कैन करना शुरू कर देती है। जैसे ही इनको कोई शिकार दीखता है गिरोह के लोग उसके आस पास मंडराने लगते हैं। मौका मिलते ही हलके से फटके से हमला करते हैं और लूट का सामान लेकर गायब हो जाते हैं।

इस वारदात को अंजाम देने का इनका दो तरीका होता है, पहला प्लैटफॉर्म पर दूसरा स्टेशन के पहले खम्बे के आस पास। गिरोह के लोग जगह-जगह लगे खंभों पर चढ़ जाते हैं। ट्रेन जैसे ही और स्लो होती है, ये लोग खंबे पर हाँथ में एक छोटा डंडा को बढ़ाते हैं और दरवाजे पर खड़े और लटके लोगों के मोबाइल को फटके से झटक देते हैं। मोबाइल नीचे ट्रैक के पास गिरता है। और फिर ये बदमाश फुर्ती से गिरे हुए मोबाइल पर झपटते हैं और फुर्र हो जाते हैं।

पुलिस के मुताबिक महज़ 6 महीने में इस गैंग ने अब तक 300 से अधिक लूट की वारदात को अंजाम दे चुके हैं। इनका सबसे ज़्यादा आतंक सेन्ट्रल एंड हार्बर लाइन में है और ऐसे दस दर्जन से अधिक गैंग शहर में सक्रिय हैं। अब उन्हें उम्मीद है की पकडे गए इन दो आरोपियों से पूछताछ के बाद कई और लोग भी जल्दी पकडे जाएंगे।


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