SPECIAL REPORT: इन पत्रकारों की भी बेरहमी से की गयी थी हत्या- आज भी इंसाफ का इंतज़ार

मुंबई के मकोका कोर्ट ने 2 मई को पत्रकार ज्योतिर्मोयी डे हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया था. छोटा राजन सहित कुल 9 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अदलात ने उन्हें उम्र क़ैद की सजा सुनाई थी. मुंबई के पत्रकार की जे डे की 11 जून 2011 को घर लौटते वक्त हत्या कर दी गयी थी.

लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं की जे डे अकेले नहीं थे जिनकी इस तरह से सच उठाने की वजह से हत्या कर दी गयी हो. उनके इलावा भी कई पत्रकार हैं जिन बेरहमी से मार दिया और आज भी उनका परिवार इन्साफ की आस में है.

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फ्रीलांस पत्रकार जगेंद्र सिंह


1 जून 2015 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में फ्रीलांस जर्नलिस्ट जगेंद्र सिंह को ज़िंदा जलाकर मार दिया गया था. जांच में सामने आया था कि, 1 जून 2015 को 2 पुलिसवाले और 4 अन्य लोग उसके घर में घुसे और उनके साथ मारपीट कि, वो लोग इस बात से नाराज़ थे जगेंद्र मंत्रीजी के खिलाफ लिखते थे वो हर रोज खनन पर फेसबुक पोस्ट डालते थे. इसी बात को लेकर उन लोगों ने जगेंद्र के ऊपर पेट्रोल डाल दिया, फिर दूसरे ने आग लगा दी. यह सबकुछ जगेंद्र के बेटे राघवेंद्र सिंह की आंखों के सामने हुआ था.

शिवानी भटनागर हत्याकांड

इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी भटनागर की उनके घर में ही निर्मम हत्या कर दी गई थी. 31 साल की शिवानी अपने पति राकेश भटनागर और 2 महीने के बेटे के साथ दिल्ली के पतपड़गंज में रहती थी. शिवानी की चाकू से हत्या की गयी थी. पुलिस ने इस मामले में हरियाणा कैडर के IPS रविकांत शर्मा और 3 अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तार किया था. बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने आईपीएस और दो अन्य को बरी किया और एक आरोपी प्रदीप शर्मा को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

शिवानी की हत्या की वजह उनके और आईपीएस रविकांत के बीच रिलेशन्स बानी थी. जिसकी डीटेल्स पब्लिक करने की वो लगातार धमकी दे रही थी।

संदीप कोठारी

संदीप कोठारी का मध्य प्रदेश के कटांगी में रेत के अवैध खनन में लिप्त तीन लोगों ने जला कर हत्या कर दी थी. संदीप लगातार रेत माफियाओं के खिलाफ लिख रहे थे जिससे नाराज़ होकर 19 जून को जब संदीप अपने एक दोस्त के साथ बाइक से जा रहा था. तभी रास्ते में कुछ लोगों ने संदीप का अपहरण कर उनकी हत्या कर लाश को रेलवे ट्रैक पर फेंककर आग लगा दी थी.

करुण मिश्रा

करूँ यूपी के सुल्तानपुर में जन संदेश टाइम्स अखबार के ब्यूरो चीफ थे. 13 फरवरी की शाम करुण अपने घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में कुछ बाइकसवारों ने उन्हें घेरकर मौत के घाट उतार दिया। करुण को क्लोज रेंज से गोली मारी गई थी।

इरफान हुसैन

यूपी के साहिबाबाद निवासी इरफान हुसैन आउटलुक मैगजीन में सीनियर कार्टूनिस्ट थे. उनकी 8 मार्च 1999 की शाम वे दिल्ली प्रेस क्लब से घर जाने के लिए निकले थे लेकिन घर नहीं पहुंचे थे. इरफान के गुमशुदा होने के दो दिन बाद एक अन्य कार्टूनिस्ट ने दावा किया कि था की उन्हें लगातार धमकियाँ आ रही थी. ये धमकी उन्हें एक राजनीतिक पार्टी से दी जा रही थी. बाद में एक और काटूनिस्ट को फ़ोन कर बताया गया की – हुसैन का मर्डर हो चुका है, अब अगला नंबर तुम्हारा ही है.

इसके बाद 13 मार्च 1999 को गाजीपुर के पास इरफान की सड़ चुकी डेडबॉडी मिली. उनके दोस्त ने सिर्फ जूते पहचानकर बॉडी की शिनाख्त की थी. इरफान की हत्या गाला घोटकर की गयी थी फिर गला रेता गया था. उनके शरीर पर कुल 28 जगह चाकू घोंपने के निशान थे और हाथ-पैर बंधे हुए थे. उनकी हत्या के पूरे एक महीने बाद पुलिस ने हुसैन का बैग पानीपत हरियाणा में मिलने का दावा किया था. बाद में करीब एक साल बाद उनकी कार का स्टीरियो एक डीलर के पास और सफेद कलर की मारुति अनंतनाग से बरामद की गई थी.

पत्रकार रंजन देव हत्या

बिहार के पत्रकार राज देव रंजन की हत्या एक राजनीतिक माफिया ने कराई थी. ऐसे आरोप लगे थे कहा जा रहा था की वह राज देव की सच्ची पत्रकारिता से परेशान था. रंजन देव की बिहार के सीवान में रेलवे स्टेशन के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हिन्दी दैनिक ‘हिंदुस्तान’ के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन को सिर और गर्दन में गोलियां मारी गई थी. इससे उनकी मौत हो गई. राजदेव रंजन 24 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे थे।

छात्र में पत्रकार अखिलेश की हत्या


झारखंड के चतरा जिले के देवरिया में एक न्यूज चैनल के 35 वर्षीय पत्रकार अखिलेश प्रताप सिंह की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी.


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