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खुलासा : इस बीमारी से जूझ रहे अभिनेता इरफ़ान खान, ओशो मैडिटेशन सेंटर में जाकर किया था इलाज का पता

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अभिनेता इरफ़ान खान द्वारा उनके गंभीर बीमारी से जूझने के एक ट्वीट ने उनके चाहने वालों के दिल को झकजोर दिया। जैसे ही लोगों ने उनका ट्वीट पढ़ा उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करने लगे। वही इरफ़ान के एक ट्वीट के बाद उनके बिमारी को लेकर तरह तरह के अफवाएं भी उड़ने लगी। अफवाएं ये भी थी कि उन्हें ब्रेन कैंसर हो गया और उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लेकिन बात में अस्पताल प्रशासन ने इसे ख़ारिज कर दिया। फिल्मों में एक्टिंग का लोहा मनवा चुके इरफान एक्टर विनोद खन्ना की तरह ही ओशो को मानने वालों में से एक रहे हैं। कुछ दिन पहले वे पुणे के ओशो मेडिटेशन रिजार्ट में आए थे। जहाँ पर उन्होंने ​मेडिटेटिव थैरेपी के बारे में जानकारी हांसिल की थी। बता दे कि मैडिटेशन थेरेपी करने से स्वयं को तनावमुक्त किया जा सकता है। इस मेडिटेशन से दर्द, बांझपान, सांसों की समस्याओं, एडिक्शन, महावारी की समस्याओं से आदमी को समाधान मिलता है।

ओशो टाइम्स की एडिटर मां अमृत साधना ने बताया कि मुंबई में शूटिंग के बीच थोड़ा वक्त निकालकर वे एक दिन अचानक पुणे पहुंचे और पूरे एक दिन ओशो गैस्ट हाउस में रहे। उन्होंने बताया कि इरफान ओशो को बहुत गहराई से पढते हैं। उस दौरान उन्होंने मां अमृत साधना से बात करते हुए कहा था,”एक वक्त था जब मैं ओशो का दीवाना था। ओशो की जो किताब हाथ में आए उसे पढता था।” पुणे पहुंचे इरफान ने ओशो मेडिटेटिव थैरेपी के बारे में डिटेल्ड जानकारी हासिल की थी। मां अमृत साधना ने बताया दूसरे दिन वे रात के सन्नाटे में रिजार्ट में स्थित बुद्ध की कई मूर्तियों के पास बैठे रहे। जाते समय उन्होंने यह भी कहा कि यहां पर कुछ स्थान ऐसे हैं जो आपको खींचते हैं मानो उनमें कोई रहस्य छुपा हो।

ओशो मेडिटेशन रिजार्ट में आने के बाद इरफान के दिल में जो अक्स उतरा उसका बयान उन्होंने इन शब्दों में लिख भेजा, “मैं ओशो के ऊर्जा क्षेत्र में पहली बार रहा। यहां रहने का अनुभव कुछ ऐसा था जैसे मैं पहली बार मुंबई आया था और मैंने पहली बार समुद्र देखा। वह अनुभव सम्मोहक था, उसमें एक बुलावा था और थी विराटता। मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेडिटेशन रिजार्ट एक ऐसी पाठशाला है जहां इन्सान खुद के बारे में सीख सके।”आगे इरफान ने लिखा था,”ओशो का केंद्र एक प्रयोगशाला है जहां आप खुद के साथ, अपने बाहर और भीतर के रूप के साथ प्रयोग कर सकते हैं; मानो हमाम में जाकर कोई अपने पुराने संस्कारों की धूल को धो डाले और साफ सुथरा होकर निकले। यह एक उपजाऊ जमीन है जहां पर आपके अंदर बीज बोया जाता है और आप उसके अंकुरित होने का इंतजार कर सकते हैं।”

Rahul Pandey

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