SPECIAL REPORT: पुलिस को मिली थी जानकारी दिव्या भारती को मारी गई गोली …

आखिर क्या है दिव्या भारती की मौत का रहस्य ? क्या दिव्या की मौत एक हादसा थी या फिर किसी साज़िश का नतीजा था ? क्यों आज तक मुंबई सिने जगत के एक छंटे सितारा सना नाडियाडवाला की मौत पर से पर्दा नहीं उठ पाया है। पूरे 23 साल बाद हम एक बार फिर उस मौत पर पड़े परदे को हटाने की कोशिश कर रहे हैं। पहली बार आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर कब और किन हालत में सना नाडियाडवाला यानी आपकी चहेती अभिनेत्री और 90 की सुपर स्टार दिव्या भारती की मौत हुई थी।

पूरे तेईस साल बाद एक बार फिर दिव्या के मौत से जुड़े हर तथ्यों को खंगालने की कोशिश की है। पहली बार हमसे उस सेकुरिटी गार्ड ने बातचीत की है, जिसने सबसे पहले दिव्या की लाश देखी थी। हम बताएँगे की उस रोज़ वेस्ट कण्ट्रोल में बैठा पुलिस सब इंस्पेकटर अरविन्द सरवणकर को कण्ट्रोल में फोन पर क्या बताया गया था? लेकिन इससे पहले हम आपको दिव्या और उससे जुडी कुछ अनसुनी कहानी बताने जा रहे हैं।

मौलाना इरफ़ान इब्न आलम ( बदला हुआ नाम, मौलाना बहराइच में हैं और उनकी उम्र 68 साल हैं)

10 मई 1992

जब दिव्या भारती अपनी बुलंदियों पर थी तभी उन्होंने फिल्म प्रोडूसर साजिद नडियादवाला के वर्सोवा स्थित तुलसी अपार्टमेंट में काजी ने इनका निकाह पढ़ाया था। क़ाज़ी इरफ़ान के मुताबिक़ उस निकाह में कुल 13 लोग शामिल हुए थे। बजाप्ता दो गवाहों के नज़र में दोनों का निकाह पढ़ाया गया था। चुकी दिव्या दूसरे धर्म की थीं तो पहले उन्होंने इस्लाम कबूला और फिर उनका नाम बदलकर ‘सना’ रखा गया। ये बात खुद साजिद नाडियाडवाला ने भी पुलिस को अपने बयान में बताया था। ‘हमने शादी की बात छिपाई रखी, क्योंकि दिव्या का करियर दांव पर लगा था। शादी के वक़्त दिव्या का नाम बदल कर सना रखा गया था। दिव्या तो ये तक चाहती थी कि आगे की फिल्मों में भी वो इसी नाम का इस्तेमाल करे। लेकिन मैंने ऐसा करने से मना किया था। मुझे डर था कि यह बात बाहर निकलती तो प्रोड्यूसर डर जाते। इससे उलट मुझे लगता था कि हमें यह बात जगजाहिर करनी थी। लेकिन इसके उलट दिव्या हमेशा से अपनी शादी की बात सबको बताना चाहती थी। हमेशा से उसकी हरकतें बच्चों जैसी रही है। उसके मम्मी पापा भी राज़ी नहीं थे और वो नाराज़ थे। उन्हें ये बात भी बुरी लग रही थी की दिव्या अब सना थी। खैर किसी तरह मैंने उसे संभाले रखा था। मैं उन्हें बार-बार मना करता था।

दिव्या से नाराज़ थे साजिद नाडियाडवाला

4 अप्रैल 19993- सुबह 10 बजे

दिव्या एक फिल्म की शूटिंग कर चेन्नई से मुंबई लौटीं थीं। उन्हें अगले दिन ही शूटिंग के लिए हैदराबाद जाना था। और हैदराबाद से लौटने के बाद वो अपने पति की फिल्म की शूटिंग के लिए मॉरीशस जाने वाली थी। इसी बीच वो घर गयीं जहाँ उनके पति साजिद नाडियाडवाला मौजूद थे। वो किसी भी हालत में दिव्या से बिना मिले मीटिंग के लिए नहीं जाना चाहते थे।

दिव्या की नौकरानी अमृता के मुताबिक़ साजिद काफी नाराज़ थे। क्यूंकि देर रात को होटल के कमरे से दिव्या मैडम ने जब फ़ोन किया था वो बहुत नशे में थी। उन्होंने किसी तरह का कोई ड्रग्स लिया था और बार बार अपनी ज़िन्दगी ख़त्म करने की बात कर रहीं थीं। दिव्या मैडम बच्चा पैदा करने की बात कर रहीं थी लेकिन सब उन्हें ये समझा रहे थे की अभी उनका कैरियर शुरू हुआ है वो ऐसा वैसा न सोंचे। जब मैडम आई तो साजिद साब पहले तो बहुत गुस्सा हुए फिर उन्हें समझाकर कहीं चले गए। इस बीच मैडम भी फ्रेश होकर सो गयीं। जाते जाते साब ने अलमारी में रखे कैश के बारे में उन्हें बताया था। शायद 20 लाख बोला था।

5 अप्रैल 1993 – 11 बजे

जब दिव्या सो रहीं थी तभी किसी पॉल नाम के आदमी का फ़ोन आया और वो उठ गयीं। इसके बाद उन्होंने कुणाल भाई को बुलाया। दोनों को बांद्रा फ़्लैट देखने जाना था लेकिन उससे पहले दिव्या ने अपने हैदराबाद के प्रोडूसर को ये कहकर आने से मना कर दिया की उनके पैर में चोट में चोट लगी थी और वो नहीं आ सकती है।

शाम को नया फ़्लैट देखने गयीं थी दिव्या, लेकिन माँ से नाराज़ थीं

शाम को दिव्या अपने भाई कुणाल और ब्रोकर के साथ बांद्रा स्थित नेपच्यून अपार्टमेंट देखने जाने वाली थी। इसी बीच उनकी और उनके माँ के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई हो गई थी। अगर पुलिस फ़ाइल में दर्ज नौकरानी अमृता के बयान की मानें तो अपने माँ के पैसों के डिमांड से दिव्या तंग आ चुकी थीं। वो नहीं चाहती थीं की उनके हर फैसले में उनकी माँ टांग अड़ायें। खैर उसके बाद वो अपना नया घर देखने चली गयीं जहाँ उन्होंने एक 4 बेडरूम फ्लैट की डील फाइनल की। कैश में भुगतान तय हुआ। अपने नए घर का डील फाइनल कर दिव्या बहुत खुश थी।

पार्टी के लिए नई ड्रेस तय करना चाहती थी दिव्या

बांद्रा का अपना नया घर देखने के बाद दिव्या अपने भाई के साथ माँ से मिलने पहुंची थी। वहां कुछ देर बिताने के बाद वो सीधे वर्सोवा स्तिथ तुलसी अपार्टमेंट के अपने फलैट आयीं। उस वक़्त शाम के पांच बज रहे थे और रात के लगभग 9 बजे नीता लुल्ला अपने पति और शहर के नामी साइकैट्रिस्ट डॉ. श्याम के साथ आने वाली थी। लेकिन उस रात ट्रैफिक की वजह से नीता एक घंटे देरी से आयीं। उस वक़्त घर पर दिव्या के साथ उनकी मेड अमृता थी। वहां आने के बाद दिव्या, श्याम और नीता लिविंग रूम में बैठ और टीवी देखने लगे थी। इस बीच दिव्या ने सबसे पहले उन्हें अपने नए घर के बारे में बताया और इस बीच वो ड्रिंक्स भी ले रही थी।

नीता का पुलिस को दिया बयान

जब हम वहां पहुंचे थे तो दिव्या पहले से ही ड्रंक थी। उसकी आवाज़ लड़ खड़ा रही थी। अमृता ने भी इशारे से बताया की वो काफी देर से कमरे में बंद थी और नशे में हैं। दिव्या को देखकर ही लग रहा था कि उसने सिर्फ शराब नहीं पिया था। जैसे ही हम वहां पहुंचे वो सीधे शराब की दो बोतलें लेकर वहां आ गयी और ड्रिंक बनाने लगी थी। हम बाते कर रहे थे की दिव्या अपना ड्रिंक लेकर अपने लिविंग रूम की खिड़की की तरफ बढ़ीं। लिविंग रूम की खिड़की सीधे पार्किंग की तरफ खुलती थी। वो करीब पांच फुट लंबा था और उसमें ग्रिल भी नहीं लगी थी। इसी बीच दिव्या अचानक खिड़की पर चढ़ गईं। और अपने दोनों पैर पांचवीं मंज़िल से बहार लटका कर बैठ गईं।

5 अप्रैल 1993 की रात 12 बज 44 मिनट( पुलिस फ़ाइल में दर्ज वक़्त ) दिव्या भारती की आखिरी रात साबित हुई थी।

नीता ने ऐसा करते देख दिव्या को टोका भी उनके पति श्याम जो उस वक्त वीसी प्लेयर पर कुछ देखने में मशगूल थे। उन्होंने ने भी मना किया लेकिन दिव्या ज़ोर ज़ोर से हंसती रही। मानो उन्हें अपनी ज़िन्दगी की कोई परवाह ही नहीं है। एक हाँथ में अपने ड्रिंक्स का ग्लास लिए खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा। एक वक़्त ऐसा लगा की वो डिस्बयलनस हो रहीं हैं फ़ौरन उसने अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया। लेकिन तभी उसका हाथ स्लिप हो गया। सब अचानक कुछ ही सेकंड्स में हुआ।

ज़िंदा थी दिव्या

भाग कर जब नीता, श्याम और अमृता भागकर नीचे पहुंचे, तो देखा कि पार्किंग में दिव्या तड़प रही है। बिल्डिंग का गार्ड ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रहा था मैडम को गोली मार दी मैडम को गोली मार दी। श्याम ने उसे चुप रहने को कहा और बताया की वो गिरी है। ये सुनते ही गार्ड दूसरी तरफ दौड़ा। जिस जगह पर दिव्या पड़ी थी वहां चारों तरफ खून खून ही बिखरा था। लेकिन दिव्या की सांसें चल रहीं थीं और वो जिंदा थी, मगर उसकी नब्ज तेजी से डूब रही थी। तब तक वहां बिल्डिंग के कुछ और लोग भी आ गए थे सभी उसे अस्पताल ले गए। कूपर हॉस्पिटल पहुँचते ही श्याम ने मुझे फ़ोन किया की दिव्या नहीं रहीं।

अनिल मैनी, फिल्म फाइनैंसर और दिव्या के पडोसी

मैं इस बिल्डिंग में पिछले 3 सालों से रह रहा हूँ। हम उस रात को 11.15 बजे घर आए और हमने खाना आर्डर किया। तकरीबन 12.40 से 12.50 के बिच हमारा बिल्डिंग का वॉचमन चिल्लाते हुए आया की दिव्या मेम बिल्डिंग से निचे गिर गयी। दिव्या मेम बिल्डिंग से निचे गिर गयी। तभी फ़ौरन मैं और मेरे दोस्त डायरेक्टर बी. मेनन और अनिल निचे भागते हुए गए। जब हम निचे पहुंचे तो हमने देखा की दिव्या खून से लतपथ थी। दिव्या की उसकी नौकरानी रो रही थी और 1 कपल दिव्या के पास खड़े हैं। (बाद में मुझे पता चला की वह स्याम और नीता लूला थे)। श्याम और नीता ने जल्दी से अपनी गाडी निकाली और मैं मेरे दोस्तों ने मिलकर दिव्या के शव को जो खून से लतपथ था गाडी के पीछे वाली सीट पर रख दी।

अनिल सूद भी उनके साथ गाडी में चले गए। दिव्या उस वक़्त जीवित थी उसकी सासें चल रही थी। श्याम लूला ने अनिल से कहा की वह दिव्या को हिलाते रहे। दिव्या की नौकरानी और नीता लूला डायरेक्टर बी.मेनन की गाडी में निकले और मैं अपनी गाडी में। श्याम की गाडी कूपर अस्पताल में सबसे पहले पहुंची। अनिल ने उसे उठाया मगर उस वक़्त दिव्या की सासें थम चुकी थी। कूपर अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके पेट पर ज़ोर लगते हुए बहुत कोशिश की उनकी जान बचाने की मगर अफ़सोस काफी देर हो चुकी थी।

हमारे पहुंचने के 5 से ७ मिनट के बाद ही साजिद भी अस्पताल पहुंच चूका था। पहले तो साजिद को पता नहीं था की दिव्या अब इस दुनिया में नही रही,मगर जैसे ही साजिद को पता चला की दिव्या का देहांत हो गया है वह पागलों की तरह चीखे जा रहा था। जैसे साजिद की खुदकी ही जान निकल गयी हो और ज़ोर ज़ोर से रोए जा रहा था। साजिद घंटो तक रो रहा था और रोते रोते वो बेहोश हो गया और ज़मीन पर गिर पड़ा।

बी मेनन और नीता लूला दिव्या के पिता और भाई कुनाल के साथ थे। जब दिव्या के पिता को दिव्या के देहांत के बारे में बताया गया तब व्याकुल पिता ज़ोर से रोने लगे और मेरी मार दी गयी, मेरी बेटी मार दी गयी कहते रहे। उनकी आवाज़ सारी रात गूंजती रही। वह अपना आप खो बैठे और अपना माथा स्ट्रेचर पर ज़ोर से मरते रहे जिसपर दिव्या को लिटाया गया था।

वह बहुत ही भयानक मंज़र था। साजिद एक कोने में पड़े थे और दिव्या के पिता दूसरे कोने पर। ( हमें दिव्या के पिता के हाथ पैर को पकड़ना पड़ा ताकि वह अपने आप को नुक्सान न पंहुचा सके )। साजिद की हालत बिगड़ते जा रही थी इसलिए उन्हें आईसीयू में भर्ती करा दिया। डॉक्टरोंने दिव्या के पिता बेहोश करने की कोशिश की ताकि वह शांत हो जाये। मगर बेहोश की दवा भी उन्हें 1 घंटे से ज़्यादा शांत नहीं रख पायी। होश में आते ही वो फिर ज़ोर से रोने लगे। तकरीबन १.३० बजे कुनाल अपनी माँ की तलाश में चला गया जो पिछले 3 घंटो से लापता हो गयी थी। दिव्या के शव को देखते ही वह सुन हो गयी थी और अपने आप को रोने से रोक न सकी। उसी हालत में उन्हें साजिद के पास ले जाया गया। अचंब , वह एक मर्तबा फिर दिव्या को देखी और वही सीढ़ियों पर बैठ गयी और गहरी सोच में डूब गयी।

कुछ पलो के बाद दिव्या के पिता अपनी पत्नी को देख देख गुस्सा हुए। अपनी पत्नी को बुरा भला कहा और चिल्लाने लगे , “ये तेरी ही करतूत है , तूने ये किया है,” और अपना आप खोते हुए उन्होंने 1 तमाचा उनके गाल पर जड़ दिया। यह देख डॉक्टर और वार्ड बॉय उनकी ओर दौड़े और उनके हाथ पैर बांध दिए। डॉक्टर ने फिर उन्हें बेहोश किया और दिव्या की माता को घर भेज दिया। उसी दौरान हमने दिव्या के कुछ इंडस्ट्री के दोस्तों को दिव्या के देहांत की खबर दी। सबसे पहले गोविंदा आए उनके बाद साजिद की माँ, बहन , बोनी कपूर,संजय कपूर आए। सुबह 5.30 मैं घर वापस आ गया, क्योंकि मेरे लायक कोई काम नहीं बचा था।

हैरान करने वाला था बिल्डिंग के चौकीदार का ब्यान

बिल्डिंग के चौकीदार ने जो पुलिस को बयाना दिया था उसके मुताबिक़, दिव्या की मौत बिल्डिंग से गिरने की वजह से नहीं बल्कि उन्हें गोली मारी गयी थी। और उसने दो बाइक सवार को वहां से भागते हुए भी देखा था। लेकिन उसकी बातों पर किसी को यक़ीन नहीं हुआ। उलटे बिल्डिंग के सेक्रेटरी ने उसे चुप करा दिया था।

पुलिस कण्ट्रोल को भी मिली थी फायरिंग की खबर

उस रात पश्चिम जोन के पोलिस कण्ट्रोल में सब इंस्पेक्टर अरविन्द सरवणकर की ड्यूटी थी। उन्होंने भी यही बताया की कण्ट्रोल को ये खबर मिली थी की फिल्म अभिनेत्री दिव्या भारती को दो बाइक सवार लोगों ने घर के बहार गोली मार दी गयी है। जिसके बाद फ़ौरन मैं कण्ट्रोल पर ये मेसेज फ्लैश किया गया। ये भी बताया गया की चुकी साजिद पर लगातार ये आरोप लगते रहे हैं कि उनके दावूद से रिश्ते हैं इसी वजह से दावूद के दुश्मनों ने दिव्या को निशाना बनाया है। बाद में ये बात गलत साबित हुई।

इस पूरे मामले को षड्यंत्र के तौर पर देखने वाले लोग दिव्या भारती के होने वाले पति साजिद नाडियाडवाला पर अंगुली उठा रहे थे। इस मृत्यु को अंडरवर्ल्ड के साथ जोड़ कर देखा जा रहा था। जिसका जवाब उस वक़्त के पुलिस अधिकारी के जावब से मिल जाता है.

डीसीपी अरूप पटनायक

सबसे पहले मुझे पुलिस कमिश्नर के दफ्तर से फ़ोन आया और मुझे बताया गया कि वर्सोवा में कुछ हुआ है दिव्या भारती को लेकर। मैंने कण्ट्रोल में चेक किया तो पता चला फायरिंग की खबर है। मै तुरंत दफ्तर से निकला।

सीधा कूपर हॉस्पिटल पहुंचा उसे तब तक मृत घोषित कर दिया गया था फ़ौरन इंस्पेक्टर जेएन जाधव को इंवेस्टिगेटिंग अफसर बनाया और मैंने इंवेस्टिगेटिंग की कमाम संभाली। हमें पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट चाहिए था। साजिद से पूछ्ताछा जरुरी थी लेकिन हो नहीं हो पा रहा था। चूँकि उसकी हालत ठीक नहीं थी। हमने funeral के बाद उसका और उसके परिवार वालों का स्टेटमेंट लेने का सोचा। हमने उस दिन कुल 5 लोगों का स्टेटमेंट लिया था। 3 लोग जो कमरे में थे चौथा गार्ड और पांचा प्रोडूसर अनिल का। नीता और उसके पति ने उस रात की पूरी कहानी बताई। नौकरानी ने वही दुहराया जो इन दोनों ने बताया था। लेकिन तीनों ने ये नहीं बताया की दिव्या ने ड्रग्स भी consumed किया है। जो काफी मात्रा में थी।

जब दिव्या के पेरेंट्स का स्टेटमेंट लिया गया तो वो साजिद को लेकर बहुत खश नहीं थे। हमने उनका बैंक स्टेटमेंट भी चेक किया। साजिद और दिव्या कुछ उनके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किये थे। पहले तो वो साजिद और अंडरवर्ल्ड के लिंक्स पर बार दबाव दे रहे थे। लेकिन बाद में वो इसपर नहीं बोले। दिव्या की मौत एक हादसा था यही कहा जा सकता है वो काफी स्ट्रेस्ड में थी। उसके पेरेंट्स से भी उसके पैसों को लेकर काफी दबाव था। इन्ही सब वजहों से वो काफी नशा करने लगी थी। उस रात भी वो काफी नशे में थी।


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