एयरपोर्ट को है खतरा ! तोड़ें 112 उंची इमारतें

मुंबई एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर बॉम्बे है कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को निर्देश दिया है की वो मुंबई एयरपोर्ट के पास बनी 112 उंची इमारतों को दो महीनों के भीतर तोड़ें या फिर उनकी हाइट घटाएं। अदालत के इस आदेश के बाद सर्कार और एयरपोर्ट के आस पास रहने वाले लोगों में हड़कंप सा मच गया है। उनके मुताबिक़ अगर ऐसा होता है तो हज़ारों परिवार सड़क पर आ जाएगा। सरकार को दखल देकर हमारी मदद करनी चाहिए।

दरअसल 2010-11 में एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सर्वे में मुंबई एयरपोर्ट के आस-पास ऐसी 112 बिल्डिंग की पहचान की गयी थी जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। ये बिल्डिंग काफी ऊंची हैं और हवाई अड्डे और वहां उतरने-उड़ने वाले हवाई यात्रियों की जिंदगी के लिए खतरा बन सकती हैं। सर्वे के ये पूरी जानकारी मुंबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने DGCA को सौंपते हुए कहा था इस ओर ध्यान देने की ज़रुरत है की ये इमारतें कभी भी बड़ा खतरा पैदा कर सकती हैं।

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लेकिन कई सालों तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई जिसके खिलाफ वकील यशवंत शेनॉय ने एक याचिका दाखिल की थी। अपनी याचिका में यशवंत शेनॉय ने कहा था की विमान ताल के आस पास इतना बड़ा खतरा होने के बाद भी कोई  कदम नहीं उठाया गया। जिसके बाद अदालत ने DGCA से पूरी रिपोर्ट मांगी थी
जिसके जवाब में , इस खतरे की जानकारी डॉयरोक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल ऐविएशन(डीजीसीए) ने कोर्ट को दी थी। डीजीसीए ने अदालत को बताया था की  जिन 112 बिल्डिंगों के खतरनाक होने की बात कही है वे हवाईअड्डे के चार किलोमीटर के दायरे में हैं। ये भी कहा था की भविष्य में ऐसा कुछ न हो इसके लिए डॉयरोक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल ऐविएशन ने  डीएन नगर, चार बंग्ला, विले पार्ले, जुहू, अंधेरी ईस्ट की अनेक बिल्डिंगों को अनुमति नहीं दी है।

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अदालत ने भी इसे खतरा माना और फाइनल ऑर्डर पास करते हुए डीजीसीए को बाकी इमारतों पर 3 महीने के भीतर कार्रवाई का निर्देश दिया। हलाकि डीजीसीए ने अदालत को बताया की आदेश के पालन के लिए जो समय सीमा दी गई है वो बेहद काम है। गौरतलब है कि मुंबई का घरेलू और इन्टरनैशनल हवाई अड्डा अंधेरी और विलेपार्ले ईस्ट में पड़ता है और यह एरिया रिहाइशी है जहां हजारों बिल्डिंग, ऑफिस, मार्केट, मॉल आदि हैं। जिसको लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी कई बार सवालखेड़ा कर चुकी हैं।

 

 


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