जब तक मुख्यमंत्री न आये मेरे शव को मत जलाना

महाराष्ट्र को किसानों का कब्रगाह न कहा जाए तो और क्या कहें ! प्रदेश में पिछले 72 घंटों में 8 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। सरकार के पास जवाब नहीं है लेकिन उनकी पार्टी प्रदेश भर में झूठा पोस्टर लगाकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। आखिर कब थमेगा मौत का ये सिलसिला ?

किसान ने लगाई फांसी, नोट में लिखा -सीएम के आने के बाद ही करें अंतिम संस्कार

आठ दिन से महाराष्ट्र में किसान हड़ताल पर हैं वो सड़क पर उतारकर अपने लिए हक़ की मांग कर रहे हैं । लेकिन अब तक सरकार की तरफ से उन्हें कोरे आश्वासन के सिवाए कुछ नहीं मिला है। इंतज़ार में हार कर मौत को गले लगाने वाले किसानों की संख्या भी बढ़ी जा रा ही है। महाराष्ट्र के कई ज़िलों में अब तक आठ हड़ताली किसान ख़ुदकुशी कर चुके हैं।

ख़ुदकुशी करने वालों में सोलापूर के करमाला तहसील के किसान धनाजी जाधव का भी नाम है। जो क़र्ज़ से काफी परेशान था और क़र्ज़ न लौटा पाने की सूरत में उसने ये क़दम उठाया है। लेकिन धनाजी जाधव ने अपने सुसाइड नोट में जो कुछ भी लिखा है शायद उसे सुनकर सरकार की आँखें खुले। अपने खुकुशी से पहले धनाजी ने मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र लिखा है।

जिसमे लिखा है की:

मेरा अंतिम संस्कार तब तक नहीं किया जाए जब तक खुद मुख्यमंत्री नहीं आते, जब तक वो गांव नहीं आते हैं, मेरा और दोस्त का कर्ज माफ नहीं होता है, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाए।

सोलापूर के करमाला तहसील के वीट गांव का किसान धनाजी चंद्रकांत जाधव 1 जून से जारी किसान आंदोलन में भी शामिल हुआ था। उसे उम्मीद थी की सरकार की तरफ से जल्द कोई रास्ता निकलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ उसने घर के पास पेड से फांसी लगी ली। धनाजी के दो बेटे हैं एक बेटा दसवीं की पढ़ाई कर रहा है तो दूसरा 12 वीं पास हुआ है। उस पर बैंक और साहुकारों से कर्ज था जिसे वह वापस नहीं लौटा रहा था।

महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में 72 घंटो में कर्ज से परेशान 8 किसानों ने ख़ुदकुशी कर ली है। गुरुवार को पुणे के बारामती इलाके में एक किसान ने जहर पीकर जान दे दी तो अकोला और करमाला में दो किसानों ने ख़ुदकुशी कर ली है। आंदोलन के बीच पिछले पांच दिनों में पांच किसानों ने खुद को फांसी लगाई।


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