आसमान में यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं पायलट।

सुरक्षा एजेंसियां ये पहले भी कई बार ये आगाह कर चुकी है की देश पर लगातार आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। आतंकी संगठन हमले के लिए किसी तरह का भी हतकंडे को अपना सकते हैं। और इसमें सबसे प्रमुख है एरियल अटैक यानी हवा के जरिया 9 /11 की तर्ज पर हमला करना। सूत्रों की मानें तो देश के दुश्मन लगतार इस फ़िराक में है की या तो वो विमान को हाईजैक कर किसी प्रमुख इमारत से टकरा दें या फिर यात्रियों को बंधक बनाकर सरकार को अपनी मांग माननें के लिए मजबूर करे। 
 
इन चेतावनियों के बाद भी एक महीने के अंदर दो ऐसेदो ऐसी घटना सामने आयी हैं जिसने न सिर्फ डीजीसीए, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों और सरकार तक के होश उड़ा दिए थे। पहला मामला था 16 फरवरी का जब जेट एयरवेज़ की मुम्बई लंदन फ्लाइट 9W-118 का अचानक ए टी सी से संपर्क टूट गया। फ्लाइट में 15 क्रियू मेंबर के साथ कुल 330  यात्री सवार थे। कई घंटों के बाद भी जब संपर्क नहीं हो पाया तो सरकार की पहल पर जर्मन सरकार ने मदद के लिए अपने लाडकु विमान को भेजा। दूसरा मामला १० मार्च का है जब एयर इंडिया की फ्लाइट का कुछ देर के लिए हंगेरियन एयर स्पेस में संपर्क टूट गया था। 
 
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सूत्र बताते हैं की दोनों मामलों की जांच में ये सामने आया है की लापरवाही फ्लाइट के पायलट की तरफ से हुई है। नियम के मुताबिक़ तय सीमा पर विमान को अपने एयरस्पेस से जुडी जानकारी वक़्त वक़्त पर एटीसी को देते रहना पड़ता है। ताकि विमान के परिचालन से जुड़ा हर रिकॉर्ड उनके पास मौजूद रहे।कहीं भी किसी तरह की कोई दिक्कत आती है तो एटीसी पहले से तैयार रहे। लेकिन पायलट इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
 
सूत्र बताते है की इस तरह की परेशानी लंबी दुरी के विमान परिचालन में बार बार सामने आ रहा है। चुकी ये सफर लंबे होते हैं तो आमतौर पर पायलट विमान को ऑटो पायलट मोड में डालकर आराम करने लगते हैं। लापरवाही इतनी बरती जाती है की स्पीकर की आवाज़ तक इतनी काम कर दी जाती है जिकी वजह से ए टी सी अगर उनसे संपर्क साधने की कोशिश भी करता है कोई जवाब नहीं मिलता।
 
 
इस पूरी जांच के बाद सरकार और डीजीसीए सख्त हो गयी है ।  मामले को गंभीरता से लेते हुए नागर विमानन महानिदेशालय यानि डीजीसीए ने दिशानिर्देश पत्रिका जारी की है जिसके मुताबिक-
 
1- स्पीकर की आवाज़ एक तय स्तर पर बरकरार रखी जानी चाहिए। इसे तय स्तर से कम या फिर स्विच ऑफ नहीं किया जाएगा। 
2- ड्यूटी पर तैनात क्रू मेंबर हेडसेट नहीं पहनेगा जबकि दूसरा क्रू मेंबर आराम/ब्रेक पर हो। 
3- आक्समिक फ्रीक्वेंसी 121.5 मेगा हर्ट्ज को हमेशा तय आवाज स्तर के साथ मॉनिटर किया जाएगा। इसके आवाज़ का स्तर कम या फिर स्विच ऑफ नहीं होना चाहिए। 
4- ब्रेक पर जाने से पहले कॉकपिट क्रू मेंबर सीसीआईसी या केबिन इन चार्ज को सूचित करेगा। 
5- ब्रेक पर जाने के 20 मिनट बाद ड्यूटी पर तैनात क्रू मेंबर सीसीआईसी या केबिन इन चार्ज के साथ संपर्क में रहेगा। अगर कोई संपर्क नहीं स्थापित हो पाता है तो सीसीआईसी/केबिन इन चार्ज कॉकपिट क्रू के साथ संपर्क करेगा। 
6- सभी एयरलाइंस कॉकपिट क्रू के ब्रेक पर निगरानी रखेंगी। डीजीसीए इन लॉग्स की आकस्मिक जांच करेगा।
 
 

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