अब महाराष्ट्र का अस्पताल बना बच्चों को क़ब्रगाह

उत्तरप्रदेश के गोरखपुर अस्पतालों में हुए बच्चों के मौत के बाद अब महाराष्ट्र में एक अस्पताल है जो बच्चों की जिंदगियां निगल रहा है। और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। बच्चों के माता पिता बड़ी उम्मीद के साथ अपने बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराते है की उनका बच्चा जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाए लेकिन इस अस्पातल में भर्ती कराने के बाद उनके उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। महाराष्ट्र के नासिक जिला अस्पताल में बच्चों के माता पिता अपने बच्चों का इलाज और जल्द से जल्द ठीक होने की उम्मीद से भर्ती कराते है। लेकिन इस अस्पताल में बच्चों को भर्ती कराने के बाद उनके माता पिता को अपने बच्चों की लाश घर ले जानी पड़ती है। ये बाते हम नहीं बल्कि सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़े कह रही है।

सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़े के मुताबिक महाराष्ट्र के नासिक जिला अस्पताल में अगस्ता महीनों में 55 बच्चों की मौत हो चुकी है। वही पिछले 5 महीनों में इस अस्पताल में 187 बच्चों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा है। आंकड़े के मुताबिक अगस्त महीने में इस अस्पताल में 350 बच्चों को भर्ती कराया गया था जिसमे 55 बच्चों की मौत हुई है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर सहित अन्य जरूरी चिकित्सा सामान नहीं होने की वजह से बच्चों की सांसे रुक जा रही हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में 18 वार्मर है और एक वार्मर में चार से पांच बच्चों को दाल दिया जाता है। इस मामले का खुलासा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एजाज पठान का आरोप है कि नासिक के जिला अस्पताल में छोटे बच्चों के लिये जो वेंटिलेटर मशीन चाहिये वो एक भी नहीं है। कुपोषित इलाकों से जो बच्चे आते हैं, उनकी व्यवस्था नासिक शहर में कहीं नहीं होती.

नासिक जिला अस्पताल में महाराष्ट्र के अलग अलग जिलों से माता पिता अपने बच्चे को इलाज के लिए लाते है। इस अस्पताल में ज्यादातर बच्चे कुपोषित इलाके से आते है और गरीब परिवार से होते है। अस्पताल में बच्चों के मौत का मामला सामने आने के बाद विपक्षी पार्टी भी सरकार को घेरने लगी है और इस्तीफे कि मांग कर रही है। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पूर्व सांसद संजय निरुपम ने सरकर पर निशाना साधते हुए कहा है कि करोड़ों रुपये अपने प्रचार पर मोदी सरकार खर्च करती है। लेकिन बच्चों को बुनियादी चिकित्सा सुविधा नहीं मुहैया करा सकती हैं। वहीं एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा कि इन बच्चों की मौत के लिये बीजेपी सरकार जिम्मेदार है और स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा देना चाहिये।

वही पुरे इस मामले सरकार और अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस अस्पताल में जो भी बच्चे आते है वो दूसरे अस्पतालों से रिफर किए गए और कमजोर बच्चे आते है। हम उन्हें बचने कि पूरी कोशिस भी करते है। वही इस्तीफे कि मांग पर स्वास्थ्य मंत्री दीपक का कहना है कि विपक्ष का काम ही इस्तीफा मांगना सरकार स्वस्थ विभाग में अच्छा काम कर रही है।

 


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