अब मुंबई कि मार्केट में आया डुप्लीकेट सिक्का

नोटेबंदी के बाद मुंबई में अब लोगों को एक नए तरीके का सामना करना पड़ रहा है।  इसकी वजह है मुंबई के बाज़ार में धड़ल्ले से चल रहा दस रूपये का डुप्लीकेट सिक्के। अब मुंबई के बाज़ारों में नकली नोटों के बाद नकली सिक्कों के भी बड़ी तेजी से खपाए जा रही है। नकली नोटों के बाद अब नकली सिक्के भी मिलना शुरू हो गए हैं। बताया जा रहा है कि इस समय बाजार में 10 रुपये के नकली सिक्कों के चलन ने काफी रफ़्तार पकड़ रखी है। जिसकी वजह से अब इन दिनों दस रूपये के सिक्के छोटे दुकानदारों ने लेने बंद कर दिये हैं। 

ऐसे कई मामले भी सामने आ रहे हैं, मुंबई के अफ़ज़ल शेख के मुताबिक बाजार में उन्हें कहीं ये सिक्का दे दिया गया था।  लेकिन जब वो इसे दूकानदार को देने लग तो उसने मना कर दिया। बताया गया कि जो सिक्का उनके पास है वो डुप्लीकेट है। जिसकी पहचान कर पाना बहुत मुश्किल होता है। 

Rs 10 coins

यही वजह है कि,चाहे रेहडीवाला हो, सब्जीवाला हो, ऑटोवाला या रिक्शा वाला सभी ने दस रूपये का सिक्का लेने से मना किया है। सब यह कहते है कि यह  सिक्का नहीं चलेगा। क्योंकि मार्केट में दस रूपये के नकली सिक्के आ गए है।

जानकारी के मुताबिक़ पूरे बाजार में करीब दो करोड़ रूपये से भी अधिक के डुप्लीकेट सिक्के चलाये जा रहे हैं। इन सिक्कों को ख़ास तौर पर ग्रामीण इलाकों में चलाया जाता है क्यूंकि वहां लोग ज़्यादा ध्यान नहीं देते हैं। लेकिन अब धीरे धीरे ये मुंबई और ठाणे के बाजार तक आ पहुंचा है।   

बताया जा रहा है कि नकली सिक्का बनाना नकली नोट बनाने से 100 गुना ज्यादा आसान होता है। एक्सपर्टों का कहना है कि 10 रुपये का नकली सिक्के बनाने के लिए पहले एक लोहे की डाई तैयार की गई होगी। जिससे एक सिक्के तैयार किये जाते होंगे। उनका कहना है कि सांचे में मेटल को लिक्विड के रूप में डालकर दूसरी सांचे का उस पर दबाव बनाकर जाली सिक्का तैयार किया जा सकता है। एक सिक्का तैयार होने में करीब 15 सेकंड का समय लगता है। छोटी सी जगह पर ये काम संभव है। नकली सिक्कों में क्या-क्या मेटल यूज हुआ। ये जांच का विषय है।


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