अब पत्नी पीड़ितों के लिए बना ख़ास आश्रम

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अनोखा आश्रम बनाया गया है। ये आश्रम उन लोगों के लिए बनाया गया है जो अपनी पत्नियों से पीड़ित हैं और जिनकी पत्नियों ने उन्हें बेहद परेशान किया है। कुछ पत्नियों द्वारा प्रताड़ित पतियों ने मिलकर ये आश्रम शुरू किया है, और इस आश्रम के ज़रिये उन पतियों को कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मदद की जाती है जिनकी पत्नियों ने उनपर मुकदमा कर रखा है। आज इस इस आश्रम में देश के अलग अलग राज्यों से लोग मदद मांगने के लिए आते हैं।

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इस आश्रम की शुरुआत भारत फुलारे नाम के एक शख्स ने की थी। जिसका दावा है की वो खुद भी पत्नी पीडित है। उनकी पत्नी ने भी उनपर घरेलु हिंसा का मामला दर्ज कराया था और उन्हें जेल तक जाना पड़ा था। उनके मुताबिक केस के बाद उन्हें इतना परेशान किया गया की उन्हें घर-बार सब छोड़ना पड़ा था। जब वो पुलिस से छुपते फिर रहे थे तभी उनकी मुलाकात तुषार वखरे और उनके जैसे ही कई और लोग मिले। उनकी पत्नियों ने भी उन पर मुकदमा दायर कर रखा था। तभी सबने मिलकर ऐसा आश्रम शुरू करने का मन बनाया जहाँ पीड़ितों को मदद मिल सके। सबने मिलकर 19 नवंबर 2016 पुरूष अधिकार दिवस के अवसर पर आश्रम की शुरूआत कर डाली। 

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भारत फुलारे के मुताबिक इस आश्रम को शुरू करने का मकसद है उन लोगों की मदद करना जो इसी तरह केस में फंसा दिए जाते हैं और उन्हें कहीं मदद नहीं मिलती। इस आश्रम के ज़रिये अब तक पांच सौ से भी अधिक पीड़ित पतियों की मदद की जा चुकी है और आश्रम में भी लोग आकर रहते हैं। आश्रम की कैटेगरी कुछ इस तरह की है, 

कैटेगरी A उनके लिए, जो निडर हैं और इस लड़ाई को खुलकर लड़ना चाहते हैं। वो शख्स जो बिना डरे किसी के भी सामने सत्य परिस्थिति रखता है और मदद की गुहार लगाता है। 

कैटेगरी B में वो लोग आते हैं, जिनकी पत्नी उनको परेशान और प्रताड़ित करती तो हैं लेकि वो ये सोंचकर खामोश रहता है की समाज उसे क्या कहेगा।

कैटेगरी C में वो लोग आते हैं , जिनकी पत्नी और ससुरालवाले उसका उत्पीडऩ करते है और उन्हें डरकर वो सामने नहीं आता है।

Society

इस आश्रम में आने और रहने वाले लोग एक ख़ास तरह की पूजा भी करते हैं। ये ख़ास पूजा है कौओं की पूजा, उनकी मान्यता है की मादा कौआ अंडा देकर उड़ जाती है लेकिन नर कौआ चूजों का पालन पोषण करता है। ऐसी ही कुछ स्थिति पत्नी पीडित पतियों की होती है। 

Ashram

ऐसा नहीं है की इस आश्रम में सबको आसानी से प्रवेश मिल जाता है। इसके लिए ख़ास नियम और शिष्ट का पालन करना पड़ता है। नियम के मुताबिक, आश्रम वैसे लोगों की मदद करेगी जिनपर पत्नी की ओर से कम से कम 20 केस दाखिल किया जा चूका है। वो लोग जो घरेलु हिंसा के मामले में जेल तक जा चुके हैं या फिर वो लोग जिन्हें पत्नी द्वारा केस दाखिल किये जाने के बाद नौकरी तक गवानी पड़ी है। और हाँ अगर कोई पहले तलाक के बाद  दूसरी शादी करने का विचार कर रहे है तो उसका इस आश्रम में आना वर्जित है।


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