दुश्मनी के लिए पाकिस्तान की क्या जरूरत जब हमारी रेलवे ही लोगों की जान लेने के लिए काफी हैः राज

मुंबई के एलिफिंस्टन ब्रिज पर हुए हादसे के बाद राजनीति पूरी तरह से शुरू हो गई। अब तमाम पार्टियां एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। कल पुल पर हुए भगदड़ के चलते 22 लोगों की मौत और 30 लोगों के घायल हो गए थे। हादसे के एक दिन बाद ही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोला है। राज ठाकरे ने अपने ही स्टाइल में सरकार को चेतावनी दी है। राज ने साफ़ कर दिया है कि अगर मुंबई में लोकल ट्रेनों के लिए सुविधाएं ठीक नहीं कि गयीं तो मुंबई में बुलेट ट्रेन के लिए एक ईंट तक नहीं रखने देंगे। राज ठाकरे यहीं नहीं रुके वह बोले कि, हमें आतंकवादियों या पाकिस्तान जैसे दुश्मनों की जरूरत नहीं है ? जब अपने ही लोग अपनों का मारने के लिए तैयार बैठे हैं। ऐसा लगता है कि हमारी अपने रेलवे ही लोगों को मारने के लिए काफी है।

राज ठाकरे ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि, मुंबई में बारिश कोई पहली बार नहीं हुई है। बारिश पहले भी हुई है और अब बजाय अपनी गलती मानने के रेलवे इस का ठीकरा बारिश पर फोड़ रहा है? उन्होंने साफ़ कर दिया है की उनकी पार्टी की तरफ से मुंबई लोकल से जुड़े इश्यूज की लिस्ट 5 अक्टूबर तक रेलवे को सौंप दी जाएगी। MNS की तरफ से रेलवे को डेडलाइन दे दी जाएगी। अगर फिर भी तय समय में हालत नहीं सुधरे तो फिर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अपनी तरह से चीजे बेहतर करेगी, फिर के पास भी बोलने के लिए कुछ नहीं रहेगा।

केंद्र सरकार और बीजेपी पर भी राज ने जमकर हमला बोला। यही किरीट सोमैय्या विपक्ष में रहते वक्त प्लेट फॉर्म की उंचाई नापता था। पिछले 3 साल से वो चुप क्युं हैं?  पिछले तीन साल में सिर्फ नोट का रंग बदला हैं और कुछ नहीं हुआ। रेल्वे के स्टेशन का नाम बदल कर क्या होगा, किडे मकौडे की तरह इस देश में लोग मर रहें हैं। उसे पहले देखने की ज़रुरत है। इतना झूट बोलने वाला प्रधानमंत्री नहीं देखा था। नरेंद्र मोदी कितना झूट बोलते हैं ये पूरा देश समझ चूका है। झूट बोलकर ही सत्ता में आये ये लोग।

सुरेश प्रभु इतना अच्छा काम कर रहें थे। इन लोगों की गलती की वजह से उन्हे निकाला गया। राज ने शिवसेना को भी नहीं बक्शा, शिवसेना सरकार में बैठकर अंडे गरमा रही हैं। सरकार में उनके मंत्री हैं, क्या कर रहें हैं वो ? कहती हैं की हमें काम करने नहीं दे रहें हैं। अगर ऐसा हैं तो सरकार से बाहर क्युं नहीं निकल जाते। बार बार भबकी क्यों देते हो ?


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