EXCLUSIVE कौन है ? जो रोज मुंबईकरों को पिला रहा है जहर

आखिर कौन है ? वो लोग जो करोड़ों मुंबईकरों के ज़िंदगी को दांव पर लगा रहे है। कुछ लोग ऐसे भी है जो अपने फायदे के लिए प्रशासन के साठगांठ के साथ करोड़ों जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रहे है। रोजाना उनके ज़िंदगी के साथ खेल रहे है। क्या मुंबई के लोगों को पता है कि उन्हें पानी के नाम पर जहर पिलाया जा रहा है? क्या उन्हें पता है कि जो वो पानी पी रहे है वो कितना शुद्ध है ? अगर आप इससे अनजान है तो lede india आपको बताने जा रहा है उनके बारे में  जो करोड़ों जिंदगी के साथ खेल रहे है और प्रशासन को मालूम रहते हुए भी वो अपनी आंखें बंद की हुई है।

दरअसल मुंबई को पानी देने वाली नाशिक वैतरना बांध का पानी जहरीला होते जा रहा। इसकी वजह है बांध में अवैध तरीके से मच्छी मारने वाले लोग। इस बांध के पास अवैध तरीके से मच्छी मारने वाले माफिया सक्रिय है। जो पानी मे मच्छी मारने के लिए दवा डालते है और वो काफी जहरीला होता है। दवा इतना जहरीला है कि उसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दवा डालने के बाद उसकी गंध काफी दूर तक फ़ैल जाती है। इसके साथ साथ दवे की वजह से वहां का पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है। आस पास के रहने वाले लोग बांध का पानी पीकर बीमार पड़ रहे और कई लोगों बीमारी के वजह से अपने जान से हाथ तक धोना पड़ा है। पिछले कुछ दिनों इस बांध का पानी पीने वाले कई जानवरों की भी मौत हुई है। इसमें सबसे हैरानी वाली बात तो ये है कि प्रशासन को इसकी जानकारी रहते हुए भी कोई कार्यवाही नही कर रहे है और वैतरना बांध की सुरक्षा भी भगवान भरोसे है।

मच्छी मारने वाले माफिया वैतरना बांध से संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर करोड़ों जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहे है। आसपास के गांववालों ने इसका काफी विरोध भी किया शिकायत भी की,  लेकिन 2 महीने से ऊपर का समय बीत चुका है अब भी इनपर कोई भी कार्यवाही नही की गई है।

मच्छी मारने वाले माफिया रात के अंधेरे में ट्रक भर कर जहरीली दावा लाकर बांध में डालते है। मरे हुए मच्चियों  को ट्रक में भरकर ले जाते है। इतना ही नही मच्छी बांध के किनारे आकर फंसे इसके लिए वो कुछ खतरनाक वनस्पतियों को पानी मे डाल देते है। खतरनाक वनस्पतियों में फंसकर कई लोगों की जान भी जा चुकी है।

जिन्दी मछलियों को मारने के लिए ये लोग रात में ट्रक भरकर जहरीली दावा लाकर पानी मे डालते और मरने के मछली पानी के किनारे रुक जाती है।

जब इससे संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस मुद्दे पर बोले से साफ इंकार कर दिया। जब संबंधित कार्यालावों का रुख किया गया तो कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नही था।बांध का देखभाल करने वाले विभाग के दफ्तर में ताला लटका हुआ था।


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