फिर पॉटहोल बना जानलेवा, महिला बाइकर की गड्ढे में गिरकर मौत

अभी ज़्यादा वक़्त नहीं गुज़रा है जब आर जे मलिश्का ने मुंबई और उसके आस पास के इलाकों की बदहाल सड़क को लेकर एक गाना बनाया था। गाना खूब वायरल हुआ लेकिन यही गाना सत्ता में बैठी शिवसेना  को इतना नगवारा  गुज़रा की उन्होंने मलिश्का के खिलाफ  जंग छेड़ दिया। शिवसेना के कई नेता सामने आए और बड़ी बड़ी बातें की, लेकिन अब इस गड्ढे यानी पॉट होल में गिरकर एक महिला बाइकर की मौत हुई है तो कोई सामने नहीं आ रहा है। सब खामोश हैं, कोई इस बात का जवाब नहीं देना चाहता की आखिर ये किसकी लापरवाही का नतीजा है जो 35 वर्षीय जागृति होगले  की मौत की वजह बना है। 
 
 
लेकिन चौंकाने वाली बात देखिये गड्ढे पर बने गाने पर भड़क जाने वालों की पुलिस भी कम नहीं है। बजाय अपनी गलती सुधारने के उलटे पुलिस ने महिला बाइकर के खिलाफ ही रैश ड्राइविंग का मामला दर्ज किया।  
 
 
मुंबई की मशहूर महिला बाइकर जागृति होगले की सड़क के एक गड्ढे ने जान ले ली। 35 वर्षीय होगले अपने बाइक क्लब बाइकरनी के साथ बाइक राइडिंग के लिए मुंबई से पालघर के जव्हार के लिए निकलीं थीं। तभी अचानक उनका बाइक का चक्का रास्ते में एक गड्ढे में अटक गया और वह गिर गईं। जागृति खुद को संभाल नहीं पायीं और उसी वक़्त बगल से गुज़र रहे ट्रक की चपेट में आ गई। उनके साथियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। यह बेहद दर्दनाक हादसा मुंबई से कुछ ही किलोमीटर दूर दाहणु जव्हार रोड पर हुआ। जिस वक़्त ये हादसा हुआ जागृति के साथ उनके क्लब बाइकरनी के ही तीन और राइडर भी उनके साथ थे। 
 
 
पुलिस की मानें तो, बांद्रा के खेर नगर की रहने वाली अपने साथियों के साथ राइड पर निकली थीं। वो हाइवे पर थीं और तभी होगले ने साथ चलने वाले एक ट्रक को ओवरटेक करने की कोशिश की, लेकिन उसी सड़क पर पानी से भरे गड्ढे को नहीं देख पाईं। उनकी बाइक का अगला पहिया गड्ढे में फँस गया और रफ़्तार की वजह से वो खुद पर नियंत्रण नहीं रख पायीं। और जिस ट्रक को वो ओवरटेक कर रहीं थी उसी  के आगे वाले पहिए की चपेट में आ गईं और उनकी जान चली गई। 
 
 
इन दिनों बारिश का मौसम है और ऐसे में मुंबई और उसके आस पास के इलाकों की सड़कें बुरी तरह बदहाल है। ये समझ नहीं आ रहा है की ये गड्ढे सड़कों पर हैं या सरकार और उसकी महानगरपालिका ने गड्ढों के बीच सड़कें बनाएं है। अगर ऐसे में कोई उनपर सवाल उठाने की कोशिश करता है या तो उन्हें नोटिस थमाकर  खामोश कर दिया जाता है या फिर सरकार सब सुनकर भी खामोश रहती है।

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