हाल में मुंबई में खतरनाक खेल ब्लू व्हेल गेम के जाल में फंसकर एक 14 साल के स्कूली छात्र ने ख़ुदकुशी

हाल में मुंबई में खतरनाक खेल ब्लू व्हेल गेम के जाल में फंसकर एक 14 साल के स्कूली छात्र ने ख़ुदकुशी कर ली थी। भारत में ब्लू व्हेल खेल से होने वाली मौत का पहला मामला था। लेकिन वक़्त रहते पुणे पुलिस हरकत में नहीं आती तो ऐसा ही एक और मामला सामने आता। खेल के स्टेज को पार करने के चक्कर में एक नाबिलग लड़का सोलापुर से पुणे तक आ गया था। इससे पहले कि वो कोई गलत कदम उठा पाता पुलिस ने उसे ट्रेक कर लिया।

खतरनाक खेल ब्लू व्हेल ने सिर्फ मुंबई ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र के कई शहरों को अपनी चपेट में ले चूका है। ताज़ा मामला महाराष्ट्र के सोलापुर का है जहाँ एक 14 साल का लड़का सुधीर भोसले अपने घर से पुणे तक पहुँच गया था। मगर परिवार को सही वक़्त पर जानकरी लग गयी और उन्होंने फ़ौरन पुलिस को इत्तेला किया। फिर क्या था महाराष्ट्र के कई शहरों में नौंवीं में पढ़ने वाले सुधीर की तलाश शुरू कर दी गयी। जांच की गयी तो सुधीर को मोबाइल लोकेशन पुणे ट्रेस हुआ।

पूछताछ में सुधीर ने बताया की वो ब्लू व्हेल गेम खेल रहा था। और इसी वजह से वो दो दिनों से स्कूल भी नहीं गया था। बुधवार को चुपचाप अपने घर से निकल गया था। वो खेल का अगला पड़ाव पार करना चाहता था इसी वजह से वो अपने घर से निकला था। पुणे पुलिस सूत्रों की मानें तो अगला स्टेज पार करने के लिए उसे ऊँची इमारत पर चढ़ना था। लेकिन ये उसे कैसे पार करने वाला था ये अब तक साफ़ नहीं है। सुधीर सोलापुर के नामी स्कूल इंडियन मॉडल स्कूल का छात्र है।

पुणे के भीगवान पुलिस थाने के अधिकारी नीलकंठ राठोड की मानें तो सबसे पहले उन्हें लड़के की जानकारी सोलापुर पुलिस से मिली थी। जब पुलिस ने लड़के का मोबाइल ट्रैक किया तो उसका लोकेशन सोलापुर-पुणे हाइवे था। सामने आया की वो किसी सरकारी बस में निकला है। जिसके बाद पुलिस सोलापुर से आने वाली हर गाडी की जांच कर रही थी। तभी उनकी नज़र सुधीर पर पड़ी वो एक बस से उतर रहा था। उस वक़्त भी मोबाइल पर गेम ही खेल रहा था। पुलिस ने उसे फ़ौरन रोका और उसके परिवार को जानकारी दी।

हालंकि पुणे पुलिस इस बात की तस्दीक़ नहीं कर रही है की लड़का ब्लू व्हेल गेम ही खेल रहा था। लेकिन खुद उसके पिता ने ये जानकारी दी है की पिछले कई दिनों से वो ब्लू व्हेल गेम के पीछे ही दीवाना था। उन्हें गेम के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी , लेकिन जब सुधीर घर से लापता हुआ तो उन्हें पता चला। सुधीर के पिता के मुताबिक़ इस गेम के चक्कर में वो पूरी तरह से खोया रहता था। उसने स्कूल और पढ़ाई तक छोड़ दी थी।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल ये है की जब इस खेल पर प्रतिबन्ध लगाने की बात सरकार और पुलिस दोनों कर चुकी है तो ऐसे में ये बच्चे इस गेम तक कैसे पहुँच रहे जो उनकी ज़िन्दगी का ही दुश्मन है।


Close Bitnami banner
Bitnami