इमारत दुर्घटना पर शुरू हुआ आरोप प्रत्यारोप का खेल

बई में हुए इमारत दुर्घटना में अब आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है। म्हाडा ने हादसे का ठीकरा बीएमसी पर फोड़ दिया है। म्हाडा ने साफ़ कह दिया है कि दुर्घटना कि वजह बीएमसी की लापरवाही है। हादसे के बाद प्रशासन की और से कहा जा रहा था की इमारत को खाली करने का नोटिस लोगों को दे दिया गया था। लेकिन लीड इंडिया के हाथ लगे एक नोटिस से खुलासा हुआ है कि बीएमसी के जर्जर इमारत कि सूची मै अलहुसैनी इमारत का नाम ही नहीं है। वही नोटिस हाथ लगने के बाद म्हाडा ने कहा है कि 2011 के ही सूची में इसे जर्जर इमारत कि सूची में डाला गया था।

बता दे कि बीएमसी हर साल बरसात के पहले जर्जर ईमारत कि सूची जारी करती है। ईमारत के लोगों को नोटिस देकर इमारत को खाली करने के लिए कहती है। हादसे के बाद बीएमसी ने अलहुसैनी इमारत के लोगों को नोटिस देने कि बात कही थी। लेकिन बीएमसी द्वारा जारी कि गई 2015-2016 और 2017  -2018 के जर्जर ईमारत कि सूची मै इस इमारत का नाम ही नहीं था। अब ऐसे में सवाल यही उठ रहा है आखिर क्या सही मै ईमारत के लोगों को खाली करने का नोटिस दिया गया था ?

सवाल एभी उठा रहा 20 लोगों के मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? वही प्रकाश मेहता का कहना है कि इस ईमारत को खाली करने का नोटिस दिया गया था। लेकिन खाली नहीं किया गया। अगर वाकई बिल्डिंग खाली करने का नोटिस दिया गया तो आखिर 2015-2016 और 2017 -2018  कि सूची में इस इमारत का नाम कैसे हटा।

आरटीआई एक्टिविस्ट शकील शेख ने बातचीत में कहा कि BMC और बिल्डर की मिली भगत से जर्जर इमारत की लिस्ट से नाम गायब करवाया गया है। जब
कि यह बिल्डिंग C केटेगरी में थी यानी C का मतलब तुरन्त खाली करने का नोटिस जो साल 2011 में ही दिया गया लेकिन बाद में नाम लिस्ट से गायब है।


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