इस बार भी हादसे के बाद उठे कई गंभीर सवाल,117 साल पुरानी इमारत को खाली क्यों कराया गया

मुंबई में एक बार फिर देखते ही देखते एक पांच मंज़िला इमारत उसमे रहने वाले लोगों के लिए कब्रगाह बन गई।  लेकिन इस हादसे के बाद एक बार फिर ये सवाल उठने लगा है की आखिर ऐसे मामलों को लेकर सरकार और बीएमसी कब गंभीर होगी। कब तक वो ऐसे ही लोगों को मरते देखेगी।  हादसे के बाद सरकार ये दावा कर रही है कि वहां रहने वाले लोगों को इमारत खाली कराने के लिए कह दिया गया था।  लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है की अगर इमारत खाली करा दी गई थी तो उसमे लोग रह कैसे रहे थे। ज़ाहिर है इस हादसे के बाद पूरा मामला सवाल और जवाब के बीच झूलता दिखाई दे रहा है। किसी के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है की इतनी मौतों की ज़िम्मेदारी किसकी है।

वहीं मुंबई के भायखला के डोंगरी इलाके में हुए बिल्डिंग हादसे में मरने वालों का आंकड़ा 11 के पार पहुंचा गया है। आशंका है की ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। हादसे में 22 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए है। घायलों को पास के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  वही अभी भी मलबे के अंदर 25 से 30 लोगों के फंसे होने की आशंका लगाई जा रही है। राहत और बचाव कार्य के दौरान दमकल विभाग के दो जवान भी घायल हो गए है।

जानकारी के मुताबिक बिल्डिंग 117 साल पुरानी थी। और बीएमसी का दावा है की उनके द्वारा बिल्डिंग में रह रहे लोगों को बिल्डिंग खाली करने का नोटिस भी दे दिया गया था। बताया ये भी जा रहा है कि बीएमसी से नोटिस मिलने के बाद कई लोगों ने इमरात को खाली भी कर दिया था। लेकिन जिनके पास रहने के लिए दुसरा आशियाना नहीं था। उन लोगों ने बिल्डिंग को खाली नहीं किया। 5 मंजिला इमारत में ऊपर का दो माहला खाली था। उसमे लोग नहीं रहते थे। नीचे के तीन माहलों में लोग रहते थे। बताया ये भी जा रहा है की बिल्डिंग के पहले मंजिल में एक नर्सरी प्ले ग्रुप भी था। जो दस बजे चालू होना था।

मिली जानकारी के मुताबिक जहां ये हादसा हुआ है। उस इलाके में इसी तरह कई पुरानी इमारत है। उसमे से कई इमारतों खाली करा दिया है। लेकिन अभी कुछ ऐसे भी इमारत है जिसमे लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रह रहे है। जिस जगह ये हादसा हुआ है। वह पूरा इलाका काफी कंजस्टेड है। जिसकी वजह से रेस्क्यू टीम को राहत और बचाव कार्य में काफी दिक्कत का सामना करना पड रहा है।

 


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