इस दर्द का कोई नाम नहीं !

महाराष्ट्र के लातूर में एक किसान की बेटी ने अपने पिता को कर्ज से बचाने के लिए कुएं में कूद कर जान दे दी। युवती को ये एहसास होने लगा  पूरी था की उसके  पिता किसान हैं जो क़र्ज़ के तले दब कर पूरी तरह टूट चुके है और ऐसे में अब वो उसकी की शादी का खर्च नहीं उठा सकते थे। 21 वर्षीया शीतल व्यंकट व्याल ने शुक्रवार को आत्महत्या की। लेकिन संयोग देखिये वो भी उसी दिन जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लातूर की ही एक 20 वर्षीया बेटी को डिजीटल लेनदेन के लिए एक करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया है। 

शीतल की ख़ुदकुशी ने सूखे का सामना कर रहे महाराष्ट्र की सामाजिक हालत का एक नया चेहरा पेश किया है। प्रदेश के लगभग किसान सूखे की चपेट में आकर पूरी तरह टूट चुके हैं, उन पर लाखों का क़र्ज़ है और बेटियां घर बैठी हैं। ज़िले में हर रोज़ कहीं न कहीं ख़ुदकुशी की खबरें आती रहती है। लेकिन जो आंकड़े सामने आये हैं वो सरकार के तमाम विकास के दावों पर सवाल खड़े करता है।

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अकेले महाराष्ट्र में मराठवाड़ा के आठ जिलों में क़र्ज़ और सूखे से तंग आकर जनवरी 2016 से 25 दिसंबर 16 तक 1023 किसानों ने आत्महत्या की। मराठवाड़ा में लातूर जिला भी आता है, जहां पिता के क़र्ज़ से परेशान होकर 21 वर्षीया शीतल व्यंकट व्याल ने ख़ुदकुशी की है वहां भी अब तक 109 किसान खुदकुशी कर काल के हाल में समां चुके हैं।

पूरे प्रदेश में ऐसी दौरान कई और ज़िलों में भी अचानक किसानों की ख़ुदकुशी के मामले बढ़ने लगे थे। क्यूंकि ये वही वक़्त है जब किसाओं के फसल बरबाद हो गई थी। ज़्यादातर किसान या तो बैंक या फिर साहूकारों से क़र्ज़ लेकर खेती करते हैं और फसल की बर्बादी के बाद वो पैसे चुकाने में सामर्थ नहीं रह पाते। ऐसे में उनपर पैसे लौटाने का दबाव बढ़ने लगता है और फिर खुद को हारा हुआ मान कर अपनी ज़िन्दगी ख़त करने का फैसला कर लेते हैं।। 

आंकड़ों की मानें तो 25 दिसंबर 16 तक बीड़ में सबसे अधिक 219 किसानों, नांदेड़ में 173, उस्मानाबाद में 159, औरंगाबाद में 145, लातूर में 109, परभणी में 97, जालना में 73 और हिंगोली में 48 किसानों ने आत्महत्या की थी।


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