इस परिवार का इस बन्दर से अनोखा रिश्ता

इंसान और कुत्तों के रिश्ते को लेकर तो आपने कई कहानियां सुनी होंगी। लेकिन कभी बन्दर और इंसान के प्यार का किस्सा सुना है. जहाँ इंसानों ने एक बन्दर को अपनी औलाद बनाया और बन्दर भी इंसान को किसी बंदरिया से ज़्यादा प्यार करता है। इंसान और बन्दर के अनोखे रिश्ते की कहानी महाराष्ट्र के यवतमाल से आ रही है। ज़िले के दिग्रस तालुका में करंट लगने से एक बंदरिया की मौत के बाद उसके बच्चे को इंसानों का एक परिवार अपने बच्चे की तरह पाल रहा है। 

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परिवार ने बन्दर के इस बच्चे को कई बार वन विभाग के हवाले भी किया लेकिन हर बार ये बच्चा भाग कर चला आता है। इतना ही नहीं इस बच्चे को छुड़ाने के बंदरों की एक बड़ी फ़ौज ने इंसानों के परिवार पर हमला भी कर चूका है। फिर भी ये बन्दर उनके साथ जाने को तैयार नहीं हुआ। वो आज भी इनके पास रहता है। 

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परिवार के मुताबिक़, जैसे ही गर्मी आता है जंगल से बंदरों का झुण्ड पानी की तलाश में गावों की ओर रुख करता है। इस तरह करीब पंद्रह दिन पहले एेसी ही एक टोली दिग्रस गांव में आई थी। लेकिन एक बंदरियां पीछे रह गई और गांव के आवारा कुत्तों ने उस पर हमला बोल दिया। कुत्तों से बचने के लिए बंदरिया ने अपने बच्चो को छोड़ा और बचने बिजली के खंबे पर चढ़ गई। खम्बे पर तार नंगे होने की वजह से वो उसकी चपेट में आ गयी और करंट लगने से उसकी मौत हो गयी । माँ की मौत के बाद बच्चा अकेला रह गया और कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। तभी वहां से गुज़र रहे रवि विलायतकर की उस पर नज़र पड़ी तो उन्होंने बच्चे को कुत्ते से बचाया और अपने साथ घर ले आये। 

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दोनों ने बच्चे की देखभाल शुरू की फिर कुछ दिन बाद बन्दर को वन विभाग के पास छोड़. इससे पहले की वो घर पहुंचते बच्चा भाग कर पहले आ गया। 
विलायतकर की पत्नी वच्छला ने इस बच्चे की देखभाल शुरु की है। अब बंदर वच्छला को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। अब बन्दर का ये बच्चा परिवार का हिस्सा बन गया है। वच्छला भी उसे अपने बच्चे के जैसे ही प्यार इसको करती हैं। इतना वच्छला मजदूरी करती हैं, मगर इस बच्चे को कहीं कोई दिक्कत न हो इसे देखते हुए वो पिछले 15 दिनों से काम पर नहीं गई। बजाप्ता बंदर को हर रोज सुबह दुध पिलाया जाता है और उसके सोने के लिए छोटा-सा पालना भी बनाया गया है। 

वच्छला की बेटी भी अब इस बन्दर के बच्चे को अपना भाई मानती है और उसकी देख रेख में कोई कसार नहीं छोड़ती। 


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