खुद बप्पा भी न बच पाए जीएसटी से, आम लोगों की तो छोड़िये

ब मोदी सरकार का नया टैक्स लोगों के लिए मुसीबत बनकर टूटा है। ऐसी मुसीबत जिसके लपेटे में खुद भगवान भी आ गए हैं। एक के बाद एक कई त्यौहार सामने हैं और लोगों को ये समझ नहीं आ रहा है की आखिर वो इसे मनाएं कैसे ? महाराष्ट्र का सबसे बड़ा पर्व गणेशोत्सव पर सबसे ज़्यादा इसकी मार पड़ी है,यही वजह है की भक्त से लेकर मूर्तिकार तक बप्पा से गुहार लगा रहे हैं। इस महंगाई में आप ही बताओ कैसे मनाएं त्यौहार। 
 
ये हाल सिर्फ भक्तों का नहीं बल्कि मूर्तिकार भी काफी परेशान हैं। मुंबई शिल्पकार अमोल हतस्कर जो पिछले 18 सालों से मूर्ति बना रहा है और सालाना 300 मुर्तिया बनाकर बेचते हैं। वो इस बार खुद को पूरी तरह से टूटा हुआ पा रहे हैं। उनकी मानें तो, इस बार जीएसटी के चलते उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बप्पा के निर्माण में जिन वस्तुओं कि जरूरते पड़ती है उनके दामों में काफी बदलाव आया है। अब सारी सामग्री पहले से कई गुना ज़्यादा दामों पर मिल रही है। जैसे कि पेंट 28% प्लास्टर 28% ,500 रुपये के कम दाम वाले कपड़ों पर 5% का टैक्स और वहीं 500 रुपये से अधिक वाले कपड़े पर 12% का कर चुकाना पड़ रहा है। मूर्ति लेने के लिए ग्राहकों को दो महीने पहले से बुकिंग करनी पड़ती है। अचानक दामों में इस तरह से बदलाव की वजह से उन्हें काफी नुक्सान उठाना पड़ रहा है।
 
कई मूर्तिकारों ने हर साल की तरह इस बार भी अपने ग्राहकों से एडवांस ले रखा था। लेकिन इस महीने में जीएसटी आने की वजह से सामग्रीयो का दाम बढ़ गया है, जिससे इस बार के बिक्री पर काफी असर पड़ रहा है।अगर ऐसा ही रहा तो कई मूर्तिकारों को अगले वर्ष और भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। 
 
अब देखना ये है की जिस बप्पो को “पुढच्या वर्षी लवकर या” कहते है इस महंगाई के बीच में सच में लोग इन्हें बुलाएंगे या जीएसटी के चलते बप्पा को घर लाने में कतराएंगे। 


Close Bitnami banner
Bitnami