किसान आंदोलन की आग, कर्ज माफी न मिलने से पांच किसानों ने की आत्महत्या

महाराष्ट्र में पिछले 6 दिनों से किसान कर्ज माफी के विरोध में सड़क पर आंदोलन कर रहे है। आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है लेकिन सरकार शायद इस आंदोलन को समझ नहीं पा रही है। अब आंदोलन के बीच में ही चीख चीख कर कर्ज माफी की गुहार लगाने वाले किसानों की ख़ुदकुशी की खबर आ रही है। किसान आंदोलन का केंद्र कहे जाने वाले नाशिक में ही महज़ कुछ घंटो में दो किसानों ने ख़ुदकुशी कर ली है। एक किसान ने फांसी लगा ली तो दूसरे किसान ने जहर पीकर अपनी ज़िन्दगी ख़त्म कर ली। दोनों किसान कर्ज में डूबे थे, आखिरी उम्मीद थी सरकार से कर्ज माफी लेकिन सपनो को टूटता देख मौत को गले लगा लिया।  

पुरे राज्य में एक तरफ किसान आंदोलन कर रहे है दूसरी तरफ तेज़ी किसानों के आत्महत्या की खबर आने लगी है। नासिक के पिंपरी गांव के रहने वाले 30 वर्षीय किसान नवनाथ भालेराव ने जहर पी कर की आत्महत्या कर ली है। 

परिवार के मुताबिक, नवनाथ 1 तारीख से ही किसान आंदोलन से जुड़े थे। आत्महत्या करने से पहले वो किसान आंदोलन में शामिल हो कर आये थे। उन्हें ये लगने लगा था की सरकार किसानों का नहीं सुनाने वाली है। हारकर उन्होंने ये कदम उठाया है। नवनाथ को तीन बच्चे है, दो बेटियां और एक बेटा है। नवनाथ के पास दो एकड़ खेती है और घर में 11 लोग खाने वाले साथ में 4 लाख का बड़ा कर्ज है। तीन साल से न खेती हो पा रही थी और ने ही बचे कूचे फसल का  उचित मूल्य मिल पा रहा था नहीं मिलते। 

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नाशिक का ही किसान गोरख सवाड़ी राम कोपने उम्र 40 साल ने भी फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। गोरख सवाड़ी राम भी कर्ज में डूबा था, उस पर जिला मध्य व्रती बैंक से डेढ़ लाख का कर्ज था और दोस्तो से भी एक लाख का कर्ज। 

देर शाम जब इनकी पत्नी और दोनों बेटे खेत मे काम कर रहे थे जब बेटा घर मे पानी पीने के आया तो देखा पिता ने ख़ुदकुशी कर ली है। गोरख कोपने काफी दिनों से परेशान थे कर्जदार लगातार इनसे पैसे मांग रहे थ

पत्नी ने बताया की, इन दिनों बैंक भी काफी परेशान कर रहा था। वो सुबह घर से चले जाते और देर रात लौट कर आते। दो एकड़ में खेती है जिसमे कोई उपज नही है। उसपर से कर्ज बढ़ता जा रहा था।  यह भी किसान आंदोलन में भाग लियक तक इस उम्मीद में कर्ज माफी होगी लेकिन सरकार के न सुनने पर इसने भी मौत को गले लगाना ही सही समझा। 

नासिक के बाद सातारा में सुरेश शंकर साबले नाम के किसान ने जहर पीकर आत्महत्या कर ली। सुरेश शंकर साबले ने साहूकार और बैंक से कर्ज लिया था। वहीँ नांदेड में परमेश्वर वानखेडे के आत्महत्या कर ली की खबर है। वर्धा में ईश्वर इंगले नाम के किसान ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।​

आंदोलन के बीच अब किसान आत्महत्या पर राजनीति भी होने लगी है। सरकार किसानों के क़र्ज़ माफ़ी की बात तो कर रही है लेकिन उन लोगों को दरकिनार किया जा रहा है जो पहले से कर्ज़दार हैं।  किसानों ने भी सरकार को चेतावनी दे दी है अगर इस बार नहीं तो फिर ये लड़ाई आमने सामने की होगी।  


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