क्या पहले से ही तय था मुंबई में किसान आंदोलन

मुंबई से सटे कल्याण डोंबिवली में हुए किसानों का हिंसक आंदोलन क्या पहले से ही तय था ? क्या इस आंदोलन में पूरी प्लानिंग के साथ पुलिस को निशाना बनाया गया था ? वही इस आंदोलन में हुए हिंसक प्रदर्शन को पुलिस पहले से तय की गयी प्लानिंग बता रही है। पुलिस की माने तो किसान आंदोलन में शामिल 400  प्रदर्शनकारियों कई गाड़ियों तोडा फोड़ा और पुलिस की कई गाडी को निशाना बनाया और उसे आग के हवाले कर दिया था। इसके लिए प्रदर्शनकारियों ने डीज़ल और पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया था.प्रदर्शनकारियों ने पास के एक पेट्रोल पंप से बोतल और कैन में पेट्रोल पहले से भर लिया था।

बता दे की पिछले कुछ दिन पहले मुंबई से सटे कल्याण डोंबिवली में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसान सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन में शामिल 400 लोगों ने गाडि़यों में तोड़फोड़ की थी। साथ ही पुलिस की कई गाडि़यों को आग के हवाले कर दिया था. कई पुलिसकर्मियों से मारपीट भी की गई थी और डीसीपी सहित छह पुलिसवाले गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने बताया की आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने सिर्फ पुलिस को निशाना बनाया। आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने नेवाली गांव सहित उसके आस पास के 17  गांव में छापेमारी की कार्यवाही की है। लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे है। पेट्रोल पंप से पेट्रोल देने वालों की भी तलाश जारी है इसके लिए पेट्रोल पंप के कर्मचारियों से पूछ ताछ जारी है। पुलिस की माने तो गिरफ्तारी के डर से सैकड़ों गांव वाले फरार हो गए है।

इस मामले में जांच कर रही ठाणे पुलिस ने बताया कि जिस जमीन को लेकर किसान आंदोलन कर रहे थे वो जमीन नेवी कि है। 1942 में नौसेना का एयरबेस बनाने के लिये नेवाली गांव की करीब 1670 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। लेकिन इस पर एयरबेस नहीं बना। गांव के किसान पिछले 75 वर्षों से यहां खेती करते आ रहे थे।  लेकिन कुछ महीनों पहले ही नौसेना ने अपनी जमीन पर दीवार बनाना शुरु किया। इसी के बाद से किसान प्रदर्शन कर रहें है।  घटना वाले दिन भी किसानों ने शांति मार्च निकालने की इजाजत पुलिस से मांगी थी जिसे पुलिस ने मंजूर कर लिया था।

ठाणे पुलिस के मुताबिक, जब किसानों का मार्च शुरु हुआ तब वो शांतिपूर्वक था लेकिन कुछ ही देर बाद भीड़ में शामिल कुछ लोग सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते हिंसा भड़क गई और पुलिस पर पथराव शुरु हो गया। पुलिस ने अपने बचाव के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने आशंका जताई है कि प्रदर्शन में राजनीतिक दलों की भी भूमिका हो सकती है।


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