लौट आया अशरफ, गूगल ने मिलवाया परिवार से – कहा मैं आतंकवादी बनाने नहीं गया था

जब माहिम का रहने वाला अशरफ अचानक घर से लापता हुआ था तो उसके परिवार से लेकर सुरक्षा एजेंसियां परेशान हो गयीं थीं। उन्हें डर था की वो आतंकी संघठन आई इस आई इस में शामिल होने चला गया है। इसके बाद तमाम एजेंसियां उसकी तलाश में लग गयी थी मगर उसका कोई अता पता चल पाया। कल अचानक वो लौट आया है लेकिन आतंकी बनकर नहीं। 

दरअसल अशरफ आतंकी संघठन आई इस आई इस से जुड़ने के लिए सीरिया या इराक नहीं गया था। बल्कि भटकते भटकते नासिक जा पहुँच था और वहीँ एक होटल में काम कर रहा था। मगर उसे न तो अपने घर का पता मालूम था और न ही उसे घरवालों की याद थी। बस वो नासिक के साई होटल में बैरे की तरह पिछले तीन महीने से काम कर रहा था। 

होटल के मालिक लक्ष्मण जाधव के मुताबिक,  3 मार्च को शिर्डी से मुंबई जाने के लिए निकले थे वहीँ बस स्टॉप पर उनकी नज़र एक लड़के पर पड़ी। वो बड़ी  बुरी हालत में था और किनारे सो रह था। उससे उन्होंने जब बात की तो वो पढ़ा लिखा लगा लेकिन उसे अपने बारे में कुछ याद नहीं था। लड़का बार बार बोल रहा था की उसे भूक लगी है। उसके पास जांच की गयी तो पहचान के नाम पर उसके पास एक पैन कार्ड था जिस पर सैयद अशरफ लिखा था। लक्ष्मण जाधव उसे अपने साथ होटल ले आये और वहीँ उसे साथ रख लिया।

दूसरी तरफ अशरफ की तलाश में परिवार के साथ ख़ुफ़िया एजेंसी ख़ाक छान रहीं थीं लेकिन उसका कोई अता पता नहीं चल पाया। 

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होटल मालिक लक्ष्मण के मुताबिक इन तीन महीनों में उन्होंने कई बार अशरफ से परिवार के बारे में पुछा। हर बार वो सवाल टाल जाता था। इस बीच उन्होंने खुद उसके बारे में जानकारी जुटाने का फैसला किया। वो लगतार गूगल पर ये तलाशते रहते की कहीं कोई अशरफ लापता तो नहीं है। अचानक 1 जून की रात वो फेसबुक पर अपने एक दोस्त का प्रोफाइल सर्च कर रहे थे तभी उसने अशरफ के बड़े भाई सैयद मोहम्मद आदिल का पोस्ट दिखा। जिसमें उसकी फोटो और जानकारी के साथ और मोबाइल नंबर भी लिखा था। लक्ष्मण जाधव ने बिना देर किये अशरफ के भाई को फोन लगाया और सारी जानकारी दी लेकिन अशरफ को कुछ नही बताया।

इसके बाद अशरफ का परिवार उसे वापस लेकर घर आये। अशरफ की माँ की कहती हैं की रमजान का महीना चल रहा है और लक्ष्मण उनके लिए फ़रिश्ते से काम नहीं है। 


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