महाराष्ट्र में किसानों का उग्र आंदोलन, शहरों को दूध-सब्जी की आपूर्ति रोकने की चेतावनी दी

महाराष्ट्र में किसानों ने कर्ज माफी और कृषि उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांगों को लेकर आज से पूरे राज्य में हड़ताल शुरू कर दिया है। कई इलाकों में किसान सड़क पर उतर आएं हैं।   किसानों ने मुंबई और सतारा में दूध सप्लाई के लिए जा रहे टैंकरों को रोक हजारों लीटर दूध सड़क पर बहा दिया। नासिक और मनमाड में भी ​ किसानों ने अपना दूध तक सड़क पर बहा दिया है, औरंगाबाद में सब्ज़ियां सड़कों पर फेक दी गयी है। किसानों ने साफ़ कर दिया है की जब तक सरकार इन मांगों को मान नहीं लेती, तब तक इस किसान अपना कृषि उत्पाद बाजार में नहीं भेजेंगे। इस हड़ताल का आह्वान किसानों के कई संगठनों ने मिलकर ‘‘किसान क्रांति’ समन्वय समिति के तहत किया है। महाराष्ट्र के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसान हड़ताल पर हैं।

महाराष्ट्र के किसानों ने राज्य में ‘किसान क्रांति’ के नाम से आंदोलन शुरू किया है। प्रदेश सरकार से बातचीत विफल होने के बाद आंदोलनकारियों किसानों ने चेतावनी दी थी कि वे एक जून से शहरों में जाने वाले दूध, सब्जी समेत अन्य उत्पाद रोकेंगे। आंदोलन कर रहे राज्ये के किसानों की शिकायत सरकार की नीतियों को लेकर है। 

किसानों की मांगें

– किसानों के सभी कर्ज माफ किए जाए,

– स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाए

– खेती के लिए बिना ब्याज के कर्ज दे,

– 60 साल के उम्र वाले किसानों को पेंशन दे,

– दूध के लिए प्रति लीटर 50 रुपये दे

इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान क्रांति के नेता जयाजी शिंदे के मुताबिक़, इन सबका एक ही हल है  किसान की कर्जमुक्ति, जबकि सरकार कर्ज़मुक्ति को लेकर दावे तो खूब कर रही है लेकिन कर्जमुक्ति  की बात स्वीकार ही नहीं कर रही है। राज्ये के किसान पूरी तरह से टूट चुके हैं, ऐसे में किसानों के पास हड़ताल करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। 

हालांकि इस हड़ताल को रोकने के लिए खुद मुख्यमंत्री ने भी कोशिश की, लेकिन पूरी तरह से असफल रहे। किसान इस बार मानने के मूड में नहीं लग रहे हैं। 

वहीँ महाराष्ट्र के कृषिमंत्री पांडुरंग फुंडकर का कहना है कि किसान का हड़ताल करना सही नहीं है।  सरकार की कोशिश है कि किसान हड़ताल न करें, सरकार की आंदोलनकारी किसानों से लगातार बातचीत चल रही हैं। 


Close Bitnami banner
Bitnami