महाराष्ट्र में ये है ` मौत ` का अस्पताल

डॉक्टर भगवान के दूसरे रूप माने जाते है और डॉक्टर्स की प्राथमिकता होती है कि मरीजों का ठीक तरह से इलाज कर और समय पर इलाज कर उन्हें रोग मुक्त बनाया जाए। जरा सोचिए अगर किसी अस्पताल में डॉक्टर्स की संख्या कम हो और जो भी डॉक्टर्स हॉस्पिटल में मौजूद है अगर उन्होंने जरा सा भी मरीजों के पीछे लापरवाही कर दी तो इसका खामियाजा मरीज और उनके परिजन को भुगतना पड़ सकता है। मैं आपको बताने जा रहा हु एक ऐसे ही अस्पताल के बारे में जहां डॉक्टर की लापरवाही और उनकी कमी के चलते पिछले 45 दिनों में यानी पिछले डेढ़ महीनों 35 से अधिक जाने जा चुकी है।

महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में गंगाबाई नामक महिला अस्पताल मौत का अस्पताल बनते दिख रहा है। जहां पिछले डेढ़ महीने में तकरीबन 35 से अधिक नवजात बच्चे के जन्म लेने के कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गयी।

गंगा मेश्राम नामक महिला इनका दुख बड़ा है, इन्होंने गंगाबाई अस्पताल में अपने बच्चे को जन्म दिया बच्चे को जन्म देने के कुछ ही घंटों के भीतर उनके बच्चे की मौत हो गई।अपने बच्चे के मौत का जिम्मेदार गंगा मेश्राम ने अस्पताल के डॉक्टरों को ठहराया। उनका साफतौर पर कहना था कि उनके बच्चे की मौत डॉक्टर की लापरवाही , सही समय पर इलाज और देख रेख नही करने की वजह से हुई है। वो इस तरह का दुख भोगने वाली गंगा अकेली महिला नही हैं। ऐसे कई लोग है जिन्हें इस तरह के दुखों का सामना करना पड़ा है। कई ने पुलिस थाने जाकर अस्पताल के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है।

पिछले डेढ़ महीने में गंगाबाई महिला अस्पताल में 35 से अधिक नवजात बच्चे की मौत हुई है जिसमे से 18 बच्चों की मौत पिछले 15 दिनों में हुई है। गंगाबाई अस्पताल गोंदिया जिले में उस जगह पर है जहां आदिवासी आबादी अधिक है और यहां की महिलाएं अधिकतर कुपोषण जैसे बीमारी से पीड़ित है। जिसका असर उनके होने वाले बच्चों पर पड़ता है।

मिली जानकारी के मुताबिक गंगाबाई अस्पताल में कई सालों  से ए ग्रेड के डॉक्टरों के तीन पद , बी ग्रेड के डॉक्टरों 5 पद खाली है जो कभी भरा ही नही गया है। इसके अलावा अस्पताल में एक्स रे डिपार्टमेंट और रेडियोलाजिस्ट, सिपाही और वार्ड बॉय को लेकर कुल 23 जगह खाली है जिसकी वजह से मरीज के इलाज में विलंब होता है।

इतना सब होने के बावजूद अस्पताल प्रशाशन को न इसकी चिंता है और ना ही स्वास्थ विभाग अभी तक जागा है। अब देखना यही होगा कि आखिर कब अस्पताल प्रशासन और स्वस्थ विभाग जागेगा और अस्पताल में होने वाली मौत का सिलसिला रुकेगा।


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