महाराष्ट्र में किसानों का आंदोलन दूसरे दिन भी

किसानों के आंदोलन को रोकने में महाराष्ट्र सरकार दूसरे दिन भी पूरी तरह से नाकामयाब दिखाई दे रही। किसान आज भी सड़क पर हैं और मंडियां खाली पड़ी है। पुलिस ने कई इलाकों में धारा 144 लगाकर कई किसानों को अपने हिरासत में भी ले चुकी है। कल जिस तरह से दूध की गाड़ियों को किसानों ने निशाना बनाया था उसे देखते हुए कोआपरेटिव मिल्क यूनियन ने दूध की सप्लाई 30% तक कम करने का फैसला लिया है। आज भी मंडियां पूरी तरह से सुनी पड़ी हैं।  

किसानों के आंदोलन को लेकर राजनीति भी शुरू हो गयी है।मुख्यमंत्री ने विपक्षी पार्टी कांग्रेस-एनसीपी पर सीधा हिंसा कराने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री ने कहा की सरकार किसानों के साथ है लेकिन इस तरह आंदोलन के ज़रिये कोई बात नहीं बन पाएगी। सरकार कर्जमाफी के लिए प्रयासरत है, प्रदेश में कुल एक करोड़ 34 लाख किसानों के बैंक में अकाउंट हैं। इसमें से 31 लाख किसान ऐसे हैं, जो क्रेडिट सिस्टम से बाहर जा चुके हैं,जिन्हें  कर्ज नहीं मिल सकता। इन किसानों को वापस क्रेडिट सिस्टम में लाने के कोशिश जारी है।

कोई भी सरकार इस तरह से कर्जमाफ नहीं कर सकता, यूपीए सरकार के वक्त भी राज्य के एक करोड़ 24 लाख किसानों में से 31 लाख किसानों का ही कर्ज माफ किया गया था।”

वहीँ दूसरी तरफ किसान क्रांति जन आंदोलन के नेताओं ने साफ़ कर दिया है कि, “किसानों का आंदोलन जारी रहेगी। हम तब तक हड़ताल झारी रखेंगे जब तक सरकार किसान कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू नहीं करती है।

किसान नेता धनञ्जय जाधव ने दावा किया कि, “आने वाले दिनों में हड़ताल का असर और ज्यादा होगा।हमारी हड़ताल सफल रही है। हमारा मूल मकसद किसानों को एकजुट करना था। इसमें हम लोग कामयाब हुए हैं। इतना तो तय है की अब हम हड़ताल खत्म करने के लिए सरकार से बातचीत करने मुंबई नहीं जाएंगे।


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