मैं भी बेटी हूँ ! प्रधानमंत्री जी मेरी भी सुनिए

नोटेबंदी का असर पूरे देश पर हुआ है, जिसे जैसे मौका मिला उसने अपने पुराने नोट को नए नोटों में बदलवा लिया। लेकिन एक ऐसी भी लड़की है जिसने अपना पेट काट काट कर कुछ पुराने नोटों में कुछ पैसे इकठ्ठा किये थे। लेकिन अब वक़्त गुज़र चूका है और वो इन नोटों को नहीं बदल सकती है। ऐसे में उसने सीधा प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है की उसकी मदद की जाए। 

प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने वाली लड़की एक सेक्स वर्कर है। जो नौकरी की तलाश में बंगलादेश से पुणे आई थी लेकिन यहाँ उसे एक कोठे पर बेच दिया गया था। लेकिन साल 2015 में कोठे पर रेड पड़ी और लड़की को मुक्त करवाया गया। जिसके बाद उसे वापस बंगलदेश उसके घर भेज दिया गया था। जब लड़की यहाँ से गयी तो अपने साथ साथ बंद हो चुके 1 हजार और 500 के 10 हजार रुपए ले गई थी। 

The survivor holds up her old currency notes worth Rs 10,000

वो इस बात से पूरी तरह अनजान थी की ये नोट अब भारत में बंद हो चूका है। अब जब पता चला तो काफी वक़्त निकल चूका था, ऐसे में इस लड़की ने उसे छुड़ाने वाली एनजीओ रेस्क्यू फाउंडेशन को एक लैटर लिखा और उसकी हेल्प करने की अपील की है। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नाम एक पत्र भी लिखा है।

 

लड़की ने पत्र में लिखा है कि, कैसे पेट पालने के लिए वह गलत लोगों के चुंगल में फंसी और कैसे उसने ये 10 हजार रुपए उसने जमा किए थे। उसने लिखा है की कैसे उसकी मजबूरी का फायदा उठाया गया था। उसके भारत आने से पहले उसकी शादी हो चुकी थी। बेरहम पति उसे पैसों के लिए मारता-पीटता था। जिसके कारण उसने शादी के तीन साल बाद उसे तलक दे दिया। उसने अपने परिवार का पेट पालने के लिए, बंगलादेश की एक गारमेंट फैक्ट्री में भी काम भी किया। ज्यादा पैसों का लालच देते हुए एक शख्स इसे मुंबई ले आया और मुंबई में उसे एक नेपाली महिला के हाथों सिर्फ 50 हजार रुपयों में बेच दिया गया। वहां से इसे पुणे के बुधवार पेठ इलाके में बेच दिया गया था। उसी नरक में काम करते हुए ये पैसे जमा किये थे 

वो बेहद गरीब है और उसे पैसों की सख्त ज़रुरत है, जो पैसे उसने जमा किये उससे उसका गुज़ारा चल सकता है। ऐसे में उसकी मदद की जाए।


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