मैंने जीनें की सारी उम्मीदें छोड़ दी थी, पंद्रह घंटे बाद मलबे से निकले

कहते है ना जाके राखो साँईया मार सके न कोई बिल्डिंग के मलबे 15 घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ते हुए राजेश दोषी (57 ) ने मौत को मात को मात दे दिया है। करीब 15 घंटे से मलबे के नीचे दबे राजेश दोषी को रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें ज़िंदा बाहर निकाला।

घटना के दिन मलबे के नीचे दबे राजेश दोषी ने अपने बेटे को करीब 5:30 बजे फ़ोन किया था।आस पास काफी शोर और आवाज के चलते उन्हें पता नही चल सका। पूरा परिवार कभी अस्पताल तो कभी पोस्टमॉर्टेम रूम जाकर उन्हें तलाश करता रहा। लेकिन उनका कहीं अता पता नहीं मिल पा रहा था, हारकर परिवार ने उनके ज़िंदा होने की सारी उम्मीदें भी छोड़ दी थी। तभी उनके बेटे की नज़र उनके मोबाइल पर पड़ी जिस पर उनके पिता का मिस कॉल था। उन्हें यक़ीन हो गया था की वो मलबे के अंदर फंसे हुए हैं और ज़िंदा हैं। इसके बाद बेटे ने फ़ौरन उन्हें वापस फ़ोन किया तो उनके पिता ने खुद जिंदा होने की बात बताई। उसके बाद उनके बेटे ने पिता के जिंदा होने की बात प्रशासन को बताई। रेस्क्यू टीम ने उन्हें करीब डेढ़ बजे रात को मलबे के अंदर से सुरक्षित निकाला।

पास के ही शांति निकेतन अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। उन्हें सिर्फ पैर में मामूली चोट लगी है। अब उनकी हालत स्थिर बतौई जा रही है। उनके बेटे ने बताया कि जब हादसा हुआ तो उनके पिता राजेश दोषी बेड पर सो रहे थे। जब उन्हें रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला तभी भी वो बेड पर लेटे हुए मिले।


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