नष्ट किया गया विस्फोटक का ज़खीरा

ठाणे पुलिस और एनएसजी कमांडोज ने दो साल पहले सिज़ गए 50 साल पुराने 59 जिंदा बम को निष्क्रिय कर दिए। इन बमो को निष्क्रिय करने के लिए विशेष  टीम बुलाई गयी थी। आबादी से दूर इन सारे विस्फोटक को शीलफाटा क्षेत्र में ले जाया गया और फिर निष्क्रिय किया गया। विशेषज्ञों की मानें तो ये विस्फोटक का इतना बड़ा ज़खीरा पूरे शहर को तबाह करने की ताकत रखते थे।

दो साल पहले ये विस्फोटक एक कबाड़ी वाले को दो साल पहले दाईघर गांव के पास जमीन में गड़े मिले थे। जिसके बाद पुलिस ने बमों को जांच के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) भेजा था। वैज्ञानिकों ने इन्हें जिंदा बताया था। जिसके बाद इसकी सुचना सेना को दे दी गयी थी। सेना के निर्देश पर एनएसजी की विशेष टीम ने सोमवार को बमों का निरीक्षण किया था। जिसके बाद इसे तत्काल प्रभाव से निष्क्रिय करने की तैयारी शुरू कर दी गयी थी। 

इसे निष्क्रिय करने से पहले स्थानीय पुलिस और NSG ने ख़ास एहतियात बरता था। सभी बमो को ख़ास तरीके से शीलफाटा क्षेत्र की पहाडि़यों में ले जाए गए। इसके बाद करीब एक किलोमीटर क्षेत्र की घेराबंदी की गई। पहले ही आसपास के ग्रामीणों को भी सुरक्षित दूरी पर भेज दिया गया था। बमों को निष्क्रिय करने के लिए कई गढ्डे खोदे गए थे। हर गढ्डे में पांच-छह बम रखकर उन्हें मिट्टी से ढक दिया गया। इसके बाद सुरक्षित विस्फोट कर उन्हें निष्क्रिय कर दिया गया। मौके पर चिकित्सकों की टीम और एंबुलेंस भी मौजूद थी।


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