पत्रकार की मुहीम रंग लायी, मदद के लिए बढे कई हाँथ

कई बार ऐसा होता है किसी कि आप मदद कि नेक कोशिश करें और मदद के लिए कई हाँथ अपने आप आगे बढ़ने लगते हैं। ऐसी ही एक कोशिश फिल्म निर्देशक और पूर्व पत्रकार विनोद कापड़ी ने कि थी। उन्होंने अपने ट्विटर पर एक ऑटो ड्राइवर की फोटो शेयर की थी। और लिखा था कि वर्सोवा में रहने वाले सईद आंखों में आंसू और अपने दो साल के बेटे को गोद में लेकर ऑटो चलाने को मजबूर है। सईद रोज़ अपने रोते हुए बेटे को गोद में लेकर मुंबई की सड़कों पर ऑटो चलाने को मजबूर है।

उनकी कि ये कोशिश एक मुहीम बन गयी और देखते ही देखते ही देखते सईद कि कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। लेकिन ये सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सिमित नहीं रहा है अब सईद कि मदद के लिए बहुत सारे लोग सामने आएं हैं और वो उसकी मदद करना चाहते हैं।

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दरअसल मुंबई के वर्सोवा इलाके में रहने वाला सईद ऑटो चलकर अपने परिवार कि परवरिश करता है। उसके दो छोटे बच्चे हैं लेकिन पत्नी को लकवा मार गया है। घर में बच्चों का देखभाल करने वाला कोई नहीं है इसलिए सईद अपने बच्चे को अपनी गोद में बिठाकर रिक्शा चलता है। ताकि वो अपनी पत्नी का यास्मिन का इलाज करा सके।  सईद कि एक छोटी बच्ची भी है जिसे वो पड़ोसियों के पास छोड़ कर घर से निकलता है।

सईद के मुताबिक़ वो हालत से लड़ रहा है, क्यूंकि वो ऑटो चलकर अपनी ज़िन्दगी गुज़र बसर कर रहा है उसके पास इतने पैसे नहीं है कि वो पत्नी का सही से इलाज करा सके। अगर वो हारकर घर बैठ जाएगा तो ज़िन्दगी और मुश्किल हो जायेगी, इसलिए उसने अपने दो साल के बेटे को गोद मेंऑटोरिक्शा चलाना शुरू कर दिया। हालकि इसमें में उसके लिए कई बार मुश्किलें आती हैं। गोद में बच्चा देखकर कुछ यात्री उनके साथ जाने से इनकार कर देते हैं। 

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पत्रकार विनोद कापडी ने सईद कि तस्वीरों के साथ उसका मोबाइल नंबर और उनका बैंक खाता नंबर भी ट्वीट किया था। जिसके बाद कई गैर सरकारी संस्थाओं और आम लोगों ने फोन कर उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया। एक ऑटो चालक कि ज़िन्दगी के साथ इस जंग कि कहानी सुनकर कई लोग मदद के लिए सामने आये हैं। लोगों ने सईद के खाते में पैसे तक जमा करना शुरू कर दिया है ताकि वो लकवाग्रस्त पत्नी यास्मीन का इलाज करा सके।

 


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