पहले भी गीता कपूर को सड़क पर छोड़ चुके हैं उनके बच्चे

आखिरकार एक महीने बाद गीता को अस्पताल से छुट्टी तो मिल गई लेकिन उनके दर्द की कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती है। अस्पातल से जब गीता कपूर को ओल्ड एज होम लाया गया तो वो काफी भावुक हो गयीं। वो बार कहती रहीं की अब हमेशा के लिए उनके बेटा और बेटी ख़त्म हो गए है जीते जी उन दोनों ने उन्हें ज़िंदा मार दिया था,वो तो अच्छा था की कुछ लोगों को उनपर तरस आयी और वो उन्हें अस्पताल तक लेकर आये और उनके लिए इतना कुछ किया। 

ये कोई पहली बार नहीं है जब उनके बच्चों ने उन्हें इस तरह मरता हुआ छोड़ दिया था। इससे पहले भी तीन महीने पहले भी एक दफा उनके बेटे ने अपनी माँ यानि गीता कपूर को एक रिक्शा ड्राइवर को पैसा देकर उन्हें फुटपाथ पर छुड़वा दिया था। उस समय गीता कपूर बीमारी के हालत में तक़रीबन एक हफ्ते तक फूटपाथ पर ही पड़ी रही। उसी बीच गीता पर एक समाज सेविका यास्मीन की नज़र पड़ी और उन्होंने तुरंत गीता को सिद्धार्थ हॉस्पिटल में भर्ती किया और पुलिस को इसकी सूचना दी. 

यास्मीन के मुताबिक फरवरी महीने में एक बुज़ुर्ग महिला को सड़क किनारे पड़ा हुआ देखा था। उस वक़्त उनकी हालत बेहद ख़राब थी जिसके बाद मैंने उन्हें सिद्धार्थ हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। उनको अपने बारे में ज़रा भी होश नहीं था, मैं भी नहीं जानती थी की वो गीता कपूर है। करीब एक हफ्ते बाद जब थोड़ा होश आया तो पुलिस के ज़रिये हमने उनके परिवार को तलाशा था। उस वक़्त गोरेगाव पुलिस उनकी बेटी को पुणे से तलाश कर मुंबई लायी, उनकी बेटी ने पुलिस को लिख कर दिया था की अब वो अपनी माँ को ऐसे नहीं छोड़ेंगी, लेकिन फिर भी उन्हें मरता हुआ उनके बच्चों ने ही छोड़ दीया।

गीता के ठीक होने के बाद जब पुलिस और अस्पताल प्रशाशन उनसे उनके परिवार के बारे जानना चाहा तो गीता सिर्फ इतना ही बोलती थी कि उनका बेटा मुंबई में रहता है और बेटी पुणे में, कैसे भी करके पुलिस ने उनकी बेटी का पता लगाकर बेटी को माँ के हालत के बारे में बताया तभी उनकी बेटी आकर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर उन्हें अपने साथ ले गयी।

‘पाकीज़ा’ और ‘रज़िया सुल्तान’ जैसी बेहतरीन फ़िल्मों में काम कर चुकीं वेटेरन एक्ट्रेस गीता कपूर को अब वृद्धाश्रम में शिफ्ट कर दिया गया हैं. 1 महीने बाद गीता को हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।


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