शिवजी का एक ऐसा मंदिर जहां नहीं है नंदी, जानिये इसके पीछे की वजह

देश भर में सावन महीने की धूम चल रही है। भगवान शिवजी का दर्शन करने के लिए मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी लंबी कतारें देखने को मिल रही है। सावन महीने का तीसरा सोमवार भी बीत चूका है। लोगों ने अबतक हर मंदिर में भगवान शिवजी के सामने एक नंदी को बैठा देखा होगा।लोग शिवजी के सामने बैठे नंदी की पूजा भी की होगी। लेकिन अब हम एक ऐसे शिवजी के मंदिर के बारे में बताने जा रहे है। उस मंदिर में शिवजी के सामने नंदी नहीं है। वो मंदिर देश में इकलौता ऐसा मंदिर है जहां शिवजी के सामने नंदी नहीं है। अब हम आपको इसके पीछे की कहानी बताने जा रहे जो बड़ी रोचक है।  

महाराष्ट्र के नाशिक जिले में प्रसिद्ध पंचवटी शहर में गोदावरी तट पर कपालेश्वर महादेव मंदिर है। इस मंदिर के बारे में पुरणों का कहना है की यहां शिवजी ने निवास किया था। कहा जाता है कि यहां नंदी की वजह से भोलेनाथ को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। जिसके बाद शिवजी ने उन्हें अपना गुरु माना और उन्हें अपने सामने न बैठने को कहा।

बताया जाता है की इस मंदिर में नंदी नहीं होने की कहानी बड़ी रोचक है। कहा जाता है कि एक दिन भरी इंद्रसभा में ब्रह्मदेव और भोलेनाथ में विवाद उत्पन्न हो गया। तभी ब्रम्हदेव के 5 मुख थे।पांच में से चार मुख वेदोच्चारण करते थे और पांचवा मुख निंदा करता था। तभी भगवान शिवजी को देख ब्रह्मदेव का पांचवा मुख निंदा करने लगा। उस वक़्त गुस्से में आकर शिवजी ब्रह्मदेव के पांचवे मुख को काट दिया। जिसके बाद शिवजी पर ब्रह्म हत्या पाप लग गया।

हत्या का पाप लगने के बाद शिवजी उस पाप से मुक्ति पाने के लिए ब्रह्मांड में घूम रहे थे। तभी शिवजी को एक ब्राम्हण के घर के सामने एक गाय और उसका बछड़ा दिखाई देता है। शिवजी गाय और उसके बछड़े को बड़ी ध्यान से देखते रहते है। तभी जिस ब्राम्हण के घर के पास गाय और बछड़ा बैठा रहता है।उस घर का ब्राह्मण बाहर निकलता है। और बछड़े के नाक में रस्सी डालने की कोशिस करता है। गुस्साए बछड़े ने ब्राम्हण को सिंग मार देता उसके बाद उसकी मौत हो जाती है। बछड़े पर भी ब्राम्हण हत्या का पाप लग जाता है। जिससे उसकी शरीर काली पड़ जाती है।

इस पाप से मुक्ति पाने के लिए अपनी मां के कहने पर बछड़ा नासिक के पास स्थित रामकुंड में नहाने पहुंचा और नहाते ही उसका पाप मिट गया। यह पूरी घटना शिवजी भी देख रहे थे। वे भी बछड़े की राह पर नासिक आये और रामकुंड में स्नान किया। इससे भोलेनाथ को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली।इसके बाद भोलेनाथ ने बछड़ा को अपना गुरु माना और अपने सामने बैठने को मना किया। तब से यहां भोलेनाथ के सामने नंदी की प्रतिमा नहीं है।

यहां भगवान राम ने किया था राजा दशरथ का श्राद्ध कपालेश्वर महादेव मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों के बाद सबसे श्रेष्ठ मंदिर माना जाता है। प्राचीनकाल में इसकी टेकरी पर शिवजी की पिंडी थी। लेकिन अब यहां एक विशाल मंदिर है।  पेशवाओं के काल में इस मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ। मंदिर की सीढ़ियां उतरते ही सामने गोदावरी नदी बहती नजर आती है।


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