मुंबई में अब `शिवसेना टैक्स`

एक ज़माने का कुंदन लाल सहगल का ये गाना बरबस ही याद आ जाता है, एक बंगला बने न्यारा…रहे जिसमे कुनबा सारा…सोने का जंगला…चांदी का…विश्व कर्मा के द्वारा. याद आता है जब लोग बंगला पूरे कुनबे के लिए बनाने का सपना देखते थे. लेकिन अब मुंबईकरों के लिए ये एक सपना ही बनकर रह जाएगा. एक तो पहले से महंगाई ऊपर से अब बीएमसी में सत्ता पर काबिज़ शिवसेना मुंबई के प्रॉपर्टी बाजार पर और अधिक बोझ डालने जा रही है. शिवसेना ने बीएमसी के बजट में प्रस्ताव दिया है कि शहर के सभी प्रॉपर्टी के सौदों पर एक फीसदी अतिरिक्त कर लगाया जाए.

दरअसल जीएसटी के लागू होने के बाद बीएमसी अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए नया जरिया ढूंढ रही है. और इसके लिए वो आम लोगों से १ फीसदी अतिरिक्त कर लगाकर बढ़ाना चाहती है .  ज़ाहिर है शिवसेना के इस प्रस्ताव के बाद मुंबई में प्रापर्टी मंहगी होने की आशंका जताई जा रही हैं. अब तो लोग इसे ‘शिवसेना टैक्स’ कहने लगे हैं.

उधर बीएमसी के शिवसेना मेयर विश्वनाथ महाडेश्वर की मानें तो यह फैसला जरूरी था. अगर मुंबईकरों को सही सुविधा देनी है तो ऐसा करना उनकी मजबूरी है, इस वक़्त महानगर पालिका को आमदनी की जरूरत है और इन टैक्सों के सहारे हम अपना काम कर सकेंगे.

इस साल बीएमसी का बजट 37 हजार करोड़ से नीचे खिसककर 26 हजार करोड़ रुपये तक आ चुका है. शिवसेना को उम्मीद है की प्रॉपर्टी के सौदों पर 1% का टैक्स लगाकर सालाना 3000 करोड़ रुपये की आमदनी हो सकती है. लेकिन बाजार के प्रॉपर्टी कारोबारी शिवसेना के इस पहल को घाटे का सौदा बता रहे हैं.

रियल्टर्स एंड डेवलपर रियाज़ अहमद के मुताबिक़ अगर इस तरह से अतरिक्त टैक्स भड़ेगा तो ज़ाहिर है इसका सीधा असर प्रॉपर्टी बाजार पर पड़ेगा. ग्राहक और डेवलपर दोनों को नुक्सान उठाना पड़ेगा. रियाज़ अहमद के मुताबिक़ बेहतर होता कि बीएमसी आमदनी ऐसा जरिया ढूंढती जिससे आम लोगों पर असर न हो, उन्हें कुछ और जरिया ढूंढना चाहिए.  क्योंकि जो भी नया कर लगेगा आखिरकार उसे ग्राहक से ही लिए जाएंगे,  ऐसे में घर महंगे होना तय है.

दूसरी तरफ पहले से धीरे चल रही मुम्बई के प्रॉपर्टी बाजार में सुस्ती चल रही है. इस बीच रेडी रेकनर के दाम 4% बढ़ने से रियल इस्टेट इंडस्ट्री पर और मार पड़ी है. ऐसे में अब ये नए शिवसेना टैक्स बोझ से मुंबई में अपना घर खरीदना बस एक सपना जाएगा.


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