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मुंबई: महाराष्ट्र में सरकार बनने की सभी संभावनाएं धूमिल होती जा रही हैं. ऐसी सूरत में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है. राज्य में अब लगभग सभी मुख्य दलों ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात कर ली है, लेकिन अभी तक किसी भी दल ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है. संविधान के जानकारों के मुताबिक, अगर राज्य में कल तक किसी ने सरकार नहीं बनाई तो राज्यपाल के पास तीन विकल्प होंगे.

1) राज्यपाल निवर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अगला मुख्यमंत्री चुने जाने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखें और नीतिगत फैसले छोड़कर बाकी प्रशासनिक फैसले लेने के लिए कहें.
2) राज्यपाल विधानसभा का सत्र बुलाएं. सदन में नेता सदन चुनने का निर्देश दें. ऐसा साल 1998 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में हो चुका है. तब कल्याण सिंह और तत्कालीन मुख्यमंत्री जगदंबिका पाल के बीच वोटिंग के जरिए सदन का नेता और मुख्यमंत्री का चुनाव हुआ था और उसमें कल्याण सिंह विजयी रहे थे.
3) राज्यपाल किसी भी दल के सरकार बनाने में असमर्थ रहने पर केंद्र को अपनी रिपोर्ट भेजें और उसके बाद विधानसभा को निलंबित कर राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा करें. फिलहाल सरकार बनाने के लिए 9 नवंबर दोपहर 12:00 बजे तक का वक्त है. अगर तब तक किसी ने भी सरकार बनाने का दावा नहीं किया तो राज्यपाल इन तीन विकल्प में से एक विकल्प को चुन सकते हैं.

शिवसेना-बीजेपी अपने-अपने रुख पर कायम
महाराष्ट्र में जिस तरह के राजनीतिक हालात महाराष्ट्र में बने हुए हैं, वहां डायलॉग खुलने की संभावनाएं कम होती जा रही हैं. शिवसेना अपने रुख पर और बीजेपी अपने रुख पर कायम है. शिवसेना ने अपने विधायकों को मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में रखा हुआ है ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट की आशंकाओं को नकारा जा सके.

वहीं, कांग्रेस भी अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाकर उन्हें राजस्थान की राजधानी जयपुर ले जाने की तैयारी कर रही है. इस बीच बीजेपी और शिवसेना के बीच बैक डोर बातचीत चल रही है, लेकिन उसका कोई भी हल निकलता नहीं नजर आ रहा है.

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