Mumbai

बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पुछा मंजूला को अस्पताल ले जाने में देरी क्यों हुई?

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भायखला जेल में मंजुला शेट्ये हत्या मामले में आज बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार जो जमकर फटकार लगाई है। अदालत ने अब इस मामले में महाराष्ट्र सरकार से हलफनामा दायर कर जवाब माँगा हैं। बॉम्बे हाइकोर्ट मंजुला हत्या मामले में प्रदीप भालेकर नाम के शख्स द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई  2 हफ्ते बाद रखी गई है।

याचिका की सुनवाई कर रही अदालत ने सरकार को जमकर लताड़ा है। अदालत ने पुछा  है की सरकार ये जवाब दे कि:  

1. जब शिकायतकर्ता ने ये जानकारी दी थी की इस मामले में सेक्सुअल एसॉल्ट हुआ है तो पुलिस ने एफआईआर में धारा 376 या 377 क्यों नही जोड़ा।

2. सरकार इस बात का जवाब दे की आखिर मंजूला को जेल से अस्पताल ले जाने और उसे मेडिकल सहायता में देरी क्यों हुई?

3. आखिर क्यों इस मामले में जेल के कैदियों को क्यों एफआईआर करने की ज़रूरत पड़ी?

मंजुला शेट्टे के मौत के मामले में प्रदीप भालेकर नाम के शख्स ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी। प्रदीप भालेकर ने अपनी याचिका के ज़रिये मांग की थी की एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376/377 भी जोड़ा जाए। क्योंकि जेल में बंद कैदियो ने मंजूला पर सेक्सुअल असाल्ट होने की बात कही थी।

आज इसी याचिका की सुनवाई के दरौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सरकार और पुलिस की मंशा पर कई सवाल भी खड़े किये हैं। उन्होंने नागपाड़ा पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर और जे जे हॉस्पिटल से कॉज ऑफ डेथ रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि, आखिर दोनों में मौत का वक़्त अलग अलग क्यों है ? ऐसा  लगता है कि मामले में कुछ न कुछ गड़बड़ ज़रूर है। नहीं तो एक ही मामले में इतनी विस्नंगतियाँ कैसे ? 

दूसरी तरफ इस मामले सर्कार का पक्ष रखते हुए सरकारी वकील ने पूरी याचिका को रद्द करने की माँग की। सरकारी वकील का कहना था कि जेल के कैदियों  को सीआरपीसी की धारा 226 के तहत अधिकार दिए गए है। अगर उन्हें वहां कुछ गलत लगता है तो वो खुद केस फ़ाइल कर सकते है। ऐसे में इसमें किसी भी प्राइवेट आदमी के पीआईएल को नही सुना जाना चाहिए।

लेकिन अदालत ने सरकारी वकील इस बात पर आपत्ति जताते हुए उन्हें लताड़ भी लगाई। कोर्ट ने सरकार वकील के इस पर फटकारते हुए कहा कि आपका ये  बयान बिल्कुल गैर ज़िम्मेदारना है। कैदी आखिर जेल अधिकारियों की शिकायत लेकर किसके पास जाएंगे।

सरकारी वकील ने ये मांग की थी कि मामले की जांच मुम्बई क्राइम ब्रांच कर रही है तो इसीलिए उन्हें हलफनामा करने को ना कहा जाए। मगर कोर्ट ने उनकी इस बात को भी नहीं मानी। अब अदालत ने इस मामले की अगली तारीख 2 हफ्ते बाद रखी है।         

Tahir Beig

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