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Bombay High Court ने मोदी सरकार को लगाई फटकार, कहा- Corona के खिलाफ करना चाहिए Surgical Strike

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मुंबई हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने कड़े शब्दों में लगाई मोदी सरकार को फटकार. कहा कोरोना वायरस के खिलाफ केंद्र सरकार का दृष्टिकोण सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) की तरह होना चाहिए था. बल्कि जो वर्तमान में स्थिति है उसे देख कर लग रहा है कि हम कोरोना वायरस से सर्जिकल स्ट्राइक की तरह लड़ने की बजाय वायरस के आने की प्रतीक्षा में सीमा पर खड़े होकर उसका इंतजार कर रहे हैं.

मुख्य न्यायाधीश दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार का वैक्सीनेशन का नया कार्यक्रम नियर टू होम (Near To Home ) कुछ ऐसा लग रहा है कि वह वायरस के आने का इंतजार कर रहे हैं. पीठ ने कहा कि गवर्नमेंट ने बेशक जन कल्याण के लिए अच्छे निर्णय लिए हैं लेकिन उनमें बहुत ज्यादा देरी हुई है जिसके परिणाम स्वरूप कई लोगों की जान गई और जनता का विश्वास सरकार पर से उठा है.

केंद्र सरकार ने मंगलवार को अदालत को बताया कि वर्तमान में घर-घर जाकर टीकाकरण करना संभव नहीं है लेकिन उन्होंने नियर टू होम यानि घर के पास टीकाकरण नाम से मुहिम शुरू की है और लोगों के घरों के आसपास तक टीकाकरण सेंटर को पहुंचाया जा रहा है. इससे आगे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र राज्य सरकार और बृहन्मुंबई महानगरपालिका को भी जमकर फटकार लगाई है. 

दरअसल देश भर में शुरू हुए डोर टू डोर कैंपेन के तहत देश के विभिन्न राज्यों में लोगों के घरों तक कोरोना वैक्सीन सेंटर को पहुंचाया गया है लेकिन बीएमसी अभी भी इसके लिए केंद्र की अनुमति का इंतजार कर रही है. ऐसे में पीठ ने बीएमसी को यह कहकर फटकार लगाई है कि जब दूसरे राज्यों में स्थानीय निकाय घर घर जाकर टीकाकरण बिना केंद्र सरकार की इजाजत के कर रहे हैं तो बीएमसी ने ऐसा क्यों नहीं किया वह अभी तक केंद्र की अनुमति का इंतजार क्यों कर रही है? यह जनहित वाला कार्य है. 

अदालत ने यह भी कहा कि हम हमेशा बीएमसी (BMC) की प्रशंसा करते हैं और कहते हैं कि BMC अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल है लेकिन इस बार बीएमसी (BMC) ने अदालत को निराश किया है.हाईकोर्ट ने बीएमसी से यह सवाल भी किया है कि टीकाकरण की अभियान की शुरुआत में एक वरिष्ठ राजनेता को मुंबई में अपने आवास पर कोरोना वैक्सीन की खुराक कैसे मिली ? 

पीठ ने बीएमसी (BMC) के वकील अनिल सखारे और राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी वकील गीता शास्त्री को यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि किस प्राधिकरण ने राजनेता को उनके आवास पर टीका लगाया था.

अदालत ने ये उम्मीद जताई है कि हमें विश्वास है कि सरकार देश में जो हो रहा है उसे ध्यान में रखते हुए एक ठोस नीति के साथ आगे आएगी केंद्र को न केवल वरिष्ठ नागरिकों और जो टीकाकरण केंद्रों में जाने में असमर्थ हैं उनको बल्कि 18 + वाले सदस्यों की भावनाओं को भी पहचानना चाहिए और उन सदस्यों का भी टीकाकरण होना चाहिए पीठ इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून को करेगा. 

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