इस बच्ची का है भगवान से सीधा रिश्ता

कहते हैं न जिसका भगवान निगहबान होता है उसका कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता। ऐसा ही एक मामला है चार साल की विदिशा का, जो दिनिया में आयी तो ज़रूर लेकिन दिल की एक गंभीर के साथ। डॉक्टरों को उस मासूम की ज़िन्दगी बचाने के लिए न सिर्फ 12 हार्ट ऑपरेशन करने पड़े बल्कि उसके बाद भी बच्ची को 6 हार्ट अटैक तक का सामना करना पड़ा । फिर भी हर परिस्थितियों को झेलते हुए विदिशा ने जिंदगी की जंग जीत ही ली। 

उसका इलाज कर रहे डॉक्टर इस मासूम को कुदरत का करिश्मा कहते हैं, उनकी मानें तो इस बच्ची का भगवान से सीधा रिश्ता है वर्ना इतना कुछ कभी कोई सोंच भी नहीं सकता। मुंबई के परेल अस्पताल में दो महीने से इलाज करा रही इस बच्ची को लोग अब चमत्कारी कहते हैं। अस्पताल ही इस बच्चे घर बना हुआ है।   


 
बच्ची विदिशा की माँ के मुताबिक़, जब बच्ची सिर्फ 45 दिन की थी, तभी इसकी तबियत बिगड़ने लगी, मैंने जैसे ही दूध पिलाया उसने उल्‍टी कर दी और फिर बेहोश हो गई। काफी कोशिशों के बाद भी बच्ची को होश नहीं आया उसके बाद ही वो उसे लेकर भागे भागे वाडिया अस्पताल में आये। डॉक्टरों ने जब जांच की तब सामने आया की बच्ची के हार्ट में  डिफेक्‍ट है। उसके हार्ट का आकार सामान्य हार्ट से बिल्कुल उल्टा था।

विदिशा का इलाज कर रहे डॉक्टरों की मानें तो, 12 घंटे चली लंबी सर्जरी के बाद उसके फिलहाल बच्ची के हार्ट ने ठीक से काम करना शुरू कर दिया है 
लेकिन मुश्किल अब भी काम नहीं है , बच्ची के फेफड़े कमज़ोर हैं और वो अब भी ठीक तरह से काम नहीं कर पा रहे हैं।

वाडिया अस्पताल डॉक्टर पांडा ने बताया, आर्टिरीज की सर्जरी जन्म के तुरंत बाद हो जानी चाहिए थी, लेकिन विदिशा के मामले में ऐसा नहीं हुआ। हार्ट की वजह से विदिशा के फेफड़े उसी बिगड़े पैटर्न पर काम करने के आदी हो चुके थे जिसकी वजह से अचानक सर्जरी के बाद वह उसमें ढल नहीं पाए। इसे अभी भी ठीक से काम करने में वक़्त जाएगा। 

विदिशा की सर्जरी में शामिल डॉक्टर सुरेश के मुताबिक, ये सब इतना सां नहीं था उसे 6 बार हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा।यह एक अनोखा मामला था जहां विदिशा के फेफड़े को स्थिर करने के लिए हमें उच्च फ्रीक्वेंसी वाले ऑसिलेटरी वेंटलिटर का इस्तेमाल करना पड़ा।