मुंबई क्राइम ब्रांच ने किया ट्रांसफर रैकिट का भंडाफोड़

विभाग चाहे कोई भी हो आप बस लाखों रूपये का भुगतान कीजिए और मनचाहा पोस्टिंग लीजिए। ऐसे ही मनचाही ट्रांसफर पोस्टिंग रैकेट चलाने वाले चार लोगों को मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक पांच सितारा होटल से रंगे हाँथ पकड़ा है। पकडे गए आरोपी मोटी रकम लेकर महाराष्ट्र में नौकरशाहों के ट्रांसफर करवाता था, वो एक ट्रांसफर या पोस्टिंग के बदले 10 से 25 लाख तक लेते थे। उनके पास से महाराष्ट्र सरकार का रबर स्टैम्प के इलावा कई लेटर हेड और करोड़ों रूपये के चेक भी मिले हैं।  गिरफ्तार आरोपियों में से एक विद्यासागर हिरमुखे महानंदा डेरी में एक बड़े पोस्ट पर है जबकि दूसरा मुख्या आरोपी किशोर माली सोलापुर का है और वो एक बड़ी राजनितिक पार्टी से जुड़ा है। बाकी दो आरोपियों की पहचान रविंद्र सिंह उर्फ़ शर्मा और विशाल ओम्ब्ले के तौर पर हुई है।

मुंबई क्राइम ब्रांच सूत्रों की मानें तो इस गिरोह के भंडाफोड़ करने में आई पी इस अधिकारी नामदेव चव्हाण की अहम् भूमिका रही है। नामदेव चव्हाण इन दिनों सोलापुर में पोस्टेड हैं। सोलापुर में ही आरोपी किशोर माली ने उनसे मिला था और उसने उन्हें मनचाही पोस्टिंग का ऑफर दिया था। तभी चव्हाण ने इन लोगों को बेनक़ाब करने की ठान ली थी। उन्होंने इसकी सुचना आला अफसरों को दी और खुद पूरे मामले का स्टिंग ऑपरेशन करने में जुट गए। तब तक इस पूरे मामले की जांच में मुंबई क्राइम ब्रांच को भी लगा दिया गया था।

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25 मई को आरोपी किशोर माली ने आई पी इस अधिकारी नामदेव चव्हाण को मुंबई के पांच सितारा होटल में बुलाया। जहाँ पहले से एक कमरे बाकी आरोपी भी मौजूद थे। चव्हाण को जैसे ही आरोपियों ने मुंबई पोस्टिंग के लिए 25 लाख की मांग रखी। पूरे स्टिंग ऑपरेशन को बहार से देख रही टीम कमरे में पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

अब तक की जांच में सामने आया है की पकडे गए आरोपी अपनी राजनैतिक पकड़ के ज़रिये कई सालों से ये पूरा खेल चला रहे थे। इतना ही नहीं मनचाही ट्रांसफर पोस्टिंग से आने वाले पैसों में से एक बाद हिस्सा मंत्रियों तक पहुँचाया जाता था। पुलिस को उम्मीद है की इस मामले की जांच में जल्द ही कई पूर्व मंत्री और बड़े राजनेताओं के सामने आ सकते हैं।