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मुंबई में यह ‘हॉर्न ऑटो’ ड्राइवरों को दे रहा है खास संदेश

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भारत की सड़कों पर सबसे ज्यादा शोरगुल होता है. देश के किसी शहर में चले जाइए आपको वहां की सड़कों पर दुनिया के अन्य किसी शहर से अधिक शोर प्रदूषण मिलेगा. सड़कों पर लगातार हॉर्न बजाना शोर प्रदूषण (न्वॉयज पलूशन) के मुख्य वजहों में माना जाता है. कई मेडिकल रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि हाई डेसिबल से इंसान के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इसे देखते हुए मुंबई में गैरजरूरी हॉर्न बजाने के खिलाफ एक अभियान शुरू किया गया है.

 

महाराष्ट्र परिवहन विभाग के सहयोग से आवाज फाउंडेशन ने ‘हॉर्नव्रत अभियान’ की शुरूआत की है. इसमें एक ऑटो रिक्शा के पूरे बॉडी पर हॉर्न लगे हुए हैं. और उसके ऊपर लिखा हुआ है कि मुंबई शहर में हर घंटे औसतन 1 करोड़ 80 लाख गुना ज्यादा हॉर्न बजाया जाता है. इस संदेश को मुंबईकरों तक पहुंचाने के लिए यह खास ऑटो रिक्शा मुंबई के अलग-अलग इलाकों में घूमेगा.

यह खास ऑटो लोगों को सड़क पर गाड़ी चलाते समय हॉर्न का कम इस्तेमाल करने की अपील कर रहा है.

यहां रहने वाले कई लोगों का मानना है कि मुंबई की तंग सड़कों पर आने-जाने के लिए हॉर्न बजाना जरूरी है वहीं कई यह मानते हैं कि वाहनचालकों का इस बारे (न्वॉयज पलूशन) में जागरूकता का अभाव ही इस समस्या की मूल वजह है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, इंसान की कान के लिए 70 डेसिबल तक सुरक्षित स्तर है. भारत की सड़कों पर बेवजह हॉर्न बजाने से यह 110 डेसिबल के स्तर तक पहुंच जाता है, जिसका परिणाम लंबे समय में नागरिकों के लिए गंभीर हो सकता है.

Source FP

 

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