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ISRO के चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर (LRO) नहीं खोज पाया. नासा ने कहा है कि अब हम विक्रम लैंडर को दोबारा अक्टूबर में खोजने का प्रयास करेंगे. नासा LRO के वैज्ञानिकों ने बताया है कि विक्रम लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) से करीब 600 किमी दूर गिरा था. 

नासा ने बताया की विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई थी. लेकिन शाम का माहौल होने की वजह से उस जगह की सही तस्वीर नहीं आ पाई है. इसलिए हम विक्रम लैंडर को खोज नहीं पाए. इसे दोबारा अक्टूबर में खोजने का प्रयास करेंगे, जब वहां पूरी रोशनी होगी.

नासा के LRO ने चांद की 3D तस्वीर जारी की है. इसमें उसने विक्रम लैंडर को खोजने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली. इधर, भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO के चेयरमैन डॉ. के. सिवन ने कहा है कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर बेहतरीन काम कर रहा है. उसके सारे पेलोड (यंत्र) सही तरीके से काम कर रहे हैं. 

ऑर्बिटर ने चांद की सतह को लेकर प्रयोग करने शुरू कर दिए हैं. हमें लैंडर से कोई सिग्नल नहीं मिला है. लेकिन हमारा ऑर्बिटर अभी भी चांद के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए उम्दा प्रदर्शन कर रहा है. विक्रम लैंडर के साथ क्या गलत हुआ, इसकी जांच राष्ट्रीय स्तर की कमेटी कर रही है. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद हम भविष्य की योजना पर काम करेंगे. 

21 सितंबर को इसरो चेयरमैन डॉ. के. सिवन ने कहा था कि मिशन चंद्रयान-2 के बाद अब इसरो गगनयान मिशन पर फोकस करेगी. इसरो चीफ डॉ. के. सिवन ने शनिवार को कहा कि चंद्रयान-2 के लैंडर से संपर्क नहीं हो पा रहा है. ऑर्बिटर काम कर रहा है. ऑर्बिटर में 8 उपकरण लगे हैं और प्रत्येक इंस्ट्रूमेंट अपना काम ठीक तरीके से कर रहा है.

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