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Exclusive- ये पांच हैं सुकमा के गुनाहगार

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आखिर कहाँ चूक हुई और किसकी गलती का खामियाज़ा 25 जवानों को अपनी ज़िन्दगी देकर चुकानी पड़ी है। सुकमा हमले के बाद ये सवाल बार बार पुछा जा रहा है। हम पहली बार इस साज़िश से जुडी कई परतें खोलने जा रहे हैं कि कैसे सुरक्षा एजेंसियों गलती पर गलती करती गयी और नक्सलियों ने इस नरसंहार का पूरा खाका खींच डाला।

सुकमा हमले की साज़िश कि परतें हम खोलेंगे,बताएँगे कैसे नक्सलियों ने इसे अंजाम तक पहुँचाया। सूत्रों की मानें तो ये हमला एक दिन की प्लैनिंग के बाद नहीं किया गया। इसके लिए पूरी तैयारी की गयी थी और इस हमले को अंजाम तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी कुख्यात नक्सली हिड़मा के इलावा रघु, देवा, पापा राव और वेट्टी को सौंपी गयी थी। जिन्होंने अपनी प्लैनिंग के ज़रिये बखूबी इसे अंजाम तक पहुँचाया भी। सूत्र बताते हैं कि नक्सलियों ने इस हमले को सटीक बनाने के लिए नौ दिन तक रिहर्सल और मॉक ड्रिल किया था। जिसमे करीब सत्तर से अस्सी नक्सली शामिल भी हुए थे।

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Exclusive- 200 लोगों का क़ातिल है ये शख्स

हिड़मा ने खुद तय किया था कि कौन सी पार्टी किस भूमिका में होगी। प्लान था सिग्नल, असाल्ट एंड रन, यानी इशारा मिलते ही हमला किया जाए और कुछ ही मिनटों में जंगल से निकल जाना है। नक्सलियों को इस बात कि जानकारी थी खाने के बाद जवान आराम करने जाएंगे और इसी का मौका उठकर हमला बोलना था। हुआ भी ठीक वैसे ही जैसे ही जवान अपने हथियार को थोड़ी दूर पर रख कर आराम करने लगे और हमला हुआ। हमले के लिए करीब ३०० नक्सलियों को शामिल किया गया था जिन्हें 75 -75 की चार टुकड़ी में बांटा गया। सबसे आगे 12 से 15 लोगों के साथ हिड़मा था जबकि बाकियों टुकड़ी कि अगवाई रघु, देवा, पापा राव और वेट्टी कर रहे थे। इतना ही नहीं इस हमले में दरभा हत्याकांड में शामिल 60 नक्सली भी शामिल थे। उन नक्सलियों का पूरा जत्था जिन्होंने परिवर्तन यात्रा कर रहे कांग्रेस नेताओं का सहांर किया था। साज़िश को अंजाम देने के लिए नौ गांव में जन मिलिटिया लगाईं गयी और ओडिशा और आंध्र के करीब 100 नक्सल को इस हमले में शामिल किया गया। हमले का नेतृत्व सुखमा, बीजापुर और दरभा डिवीज़न कर रहा था। बीजापुर और दरभा जंगल के चप्पे चप्पे से जानकार है।

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Exclusive – ख़ुफ़िया एजेंसियों कि चूक का नतीजा है सुकमा हमला

सूत्रों कि मानें तो, कोसा इस हमले में माद्दा, मडकामी,सोमी पोट्टम,मंगतू,कुम्मा गोंदे, ककम और लखु जैसे कुख्यात माओवादी इस हमले में शामिल थे जिनकी तलाश सुरक्षा एजेंसियों काफी अरसे से है। स्टेट ख़ुफ़िया एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी कि मानें तो नक्सलियों ने राशन कि बोरियों में भर भर कर हथियार लाये थे और इस लाकर स्टॉक किया गया था। और तो और आम तौर पर पेट्रोलिंग टीम सर्च पार्टी के साथ गांव में जा जा कर जांच करती है, लेकिन पिछले एक हफ्ते से इस ओर भी लापरवाही बरती गयी।

वहीँ ख़ुफ़िया एजेंसियां ये दावा कर रहीं की उनकी तरफ से हर जानकारी पहुंचाई गयी थी, बाजवूद इसके सुकमा में सड़क निर्माण सुरक्षाबलों को लगाया गया था जबकि साफ़ तौर पर अलर्ट के ज़रिये बताया गया था की नक्सली एक बड़ी साज़िश को अंजाम दे सकते हैं। वारदात बुरकापाल में हुई, वहां से दोनों तरफ छह किमी के दायरे में सीआरपीएफ के दो कैंप हैं। कई घंटे तक मुठभेड़ चलता रहा फिर भी दोपहरी में हुई इस वारदात में नक्सली एम्बुश में फंसे जवानों को मदद नहीं मिल पाई।

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एसआईबी के सूत्रों ने दावा किया है कि बुरकापाल के पास नक्सलियों के सक्रिय होने की बीते चार-पांच दिन से लगातार खुफिया सूचना दी जा रही थी। इसके बावजूद जवानों ने लापरवाही की। जवानों को भी लापरवाही न बरतने कि हिदायत थी बावजूद इसके जवान खाना खाकर आराम करने लग गए थे। मौके की ताक में बैठे नक्सलियों ने इसका फायदा उठाते हुए हमला कर दिया। इससे जवानों को संभालने का मौका नहीं मिला।

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