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महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी के बीच सरकार बनाने को लेकर आम सहमति बनती नहीं दिख रही है. हालाकिं दोनों ही पार्टियाँ अपने अपने दम पर सरकार बनाने का दावा तो कर रही हैं लेकिन अभी तक ना  तो शिवसेना और ना ही बीजेपी ने सरकार बनाने की तरफ कदम बढ़ाया है.105 विधायको वाली बीजेपी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. हैं तो वहीं शिवसेना के 54 विधायकों के साथ एनसीपी और कांग्रेस सहित अन्य सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाने की संभावना तलाश कर रही है.

लेकिन सूबे में तेजी से बदल रहे राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस को विधायकों की खरीद फरोख्त का डर सताने लगा है. इसी क्रम में विजय वडेट्टीवार के घर पर कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई गई थी. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष बाला साहेब थोरात का ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि बीजेपी विधायकों  को अपने पाले में करने से लिए किसी भी हद तक जा सकती है. ऐसे मेन हमें कांग्रेस विधायकों को उनके हथकंडों से बचाना है. वे कर्णाटक में कामयाब हो गए, लेकिन हम उन्हें महाराष्ट्र में ऐसा नहीं करने देंगे. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी, महात्मा फुले, डाक्टर बीआर अम्बेडकर, संत ज्ञानेश्वर और नामदेव की धरती है.

बताया जा रहा है कि गुरुवार को हुई मीटिंग में कांग्रेस ने विधायकों को मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भेजने का फैसला किया. सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने अपने विधायकों को अपनी सुविधानुसार नागपुर, औरंगाबाद और मुंबई में इक्कठा होने के लिए कहा. जिसके बाद सभी 44 विधायकों को एक निजी चार्टर विमान से राजस्थान भेजा गया. जहां उन्हें जयपुर में रखा गया है.

वहीं दूसरी तरफ  गुरुवार को बीजेपी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी, लेकिन सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया. ऐसे में लगा रहा है कि राज्यपाल  राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा कर सकते हैं. ऐसा नहीं है की सिर्फ कांग्रेस को ही विधायकों की खरीद फ़रोख्त का डरा सता  रहा है. कांग्रेस के साथ ही  शिवसेना ने भो अपने विधायकों को बीजेपी के ऑपरेशन कमल से बचाने के लिए मुंबई के एक होटल के रखा है. ध्यान  देने वाली बात ये है की यह होटल मातोश्री से मात्र कुछ ही मिनटों की दूरी पर स्थित है.

कांग्रेस नेता  विजय वडेट्टीवार ने सूत्रों के  हवाले से बताया की बीजेपी की तरफ से एक शिवसेना विधायक को 50 करोड़ का ऑफर दिया गया था. विजय वडेट्टीवार का कहन है की यह रकम विधायक को सिर्फ इसलिए दी जा रही थी कि या तो वे बीजेपी में शामिल हो जाएं नहीं तो बहुमत परिक्षण के समय अनुपस्थित रहें.

आपको बता दें की कई कांग्रेसी विधायक महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी की सरकार के पक्ष में है. विधायकों का मानना है कि बीजेपी को रोकने के लिए एनसीपी और शिवसेना को सरकार बनानी चाहिए और कांग्रेस को बाहर से समर्थन देना चाहिए. इसके बदले कांग्रेस को स्पीकर पद पर दावा करना चाहिए.

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